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27 नवंबर, 2010

"डस्टर कष्ट बहुत देता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

विद्यालय अच्छा लगता,
पर डस्टर कष्ट बहुत देता है।
पढ़ना तो अच्छा लगता,
पर लिखना कष्ट बहुत देता है।।

दीदी जी तो अच्छी लगतीं,
पर वो काम बहुत देती हैं।
छोटी से छोटी गल्ती पर,
डस्टर कई जमा देतीं हैं।।

कोई तो उनसे यह पूछे,
क्या डस्टर का काम यही है?
कोमल हाथों पर चटकाना,
क्या इसका अपमान नही है??
दीदी हम छोटे बच्चे हैं,
कुछ तो रहम दिखाओ ना।
डाँटो भी, फटकारो भी,
पर हमको मार लगाओ ना।।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

24 नवंबर, 2010

" नन्हे सुमन की आराधना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

तार वीणा के सुनाओ कर रहे हम कामना।
माँ करो स्वीकार नन्हे सुमन की आराधना।।
इस ध्ररा पर ज्ञान की गंगा बहाओ,
तम मिटाकर सत्य के पथ को दिखाओ,
लक्ष्य में बाधक बना अज्ञान का जंगल घना।
माँ करो स्वीकार नन्हे सुमन की आराधना।।

बेसुरे से राग में, अनुराग भर दो,
फँस गये हैं हम भँवर में, पार कर दो,
शारदे माँ कुमति हरकर सबको मेधावी बना।
माँ करो स्वीकार नन्हे सुमन की आराधना।।

वन्दना है आपसे, रसना में रस की धार दो,
हम निपट अज्ञानियों को मातु निज आधार दो,
माँ हमें वरदान दो, होवें सुफल सब साधना।
माँ करो स्वीकार नन्हे सुमन की आराधना।।

15 नवंबर, 2010

“गौमाता” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

black cow_1सुन्दर-सुन्दर गाय हमारी।
काली गइया कितनी प्यारी।।

जब इसको आवाज लगाओ।
काली कह कर इसे बुलाओ।।।

तब यह झटपट आ जाती है।
अम्मा कह कर रम्भाती है।।
23022009290यह इसका है छोटा बछड़ा।
अक्सर करता रहता झगड़ा।।

जब यह भूखा हो जाता है।
जोर-जोर से चिल्लाता है।।

रस्सी खोल इसे हम लाते।
काली का दुद्धू पिलवाते।।

मम्मी बर्तन लेकर आती।
थोड़ा दूध दूह कर लाती।।

गाय हमारी गौमाता है।
दूध-दही की यह दाता है।।

07 नवंबर, 2010

“बिल्ली मौसी” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

catबिल्ली मौसी बिल्ली मौसी,
क्यों इतना गुस्सा खाती हो।
कान खड़ेकर बिना वजह ही, 
रूप भयानक दिखलाती हो।।
OLYMPUS DIGITAL CAMERA         मैं गणेश जी का वाहन हूँ,
मैं दुनिया में भाग्यवान हूँ।। 
चाल समझता हूँ सब तेरी,
गुणी, चतुर और ज्ञानवान हूँ।
cat_1 छल और कपट भरा है मन में,
धोखा क्यों जग को देती हो?
मैं नही झाँसे में आऊँगा,
आँख मूँद कर क्यों बैठी हो?

02 नवंबर, 2010

“टॉम-फिरंगी…चौकीदार हमारे!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

टॉम-फिरंगी प्यारे-प्यारे।
दोनों चौकीदार हमारे।।

हमको ये लगते हैं अच्छे।
दोनों ही हैं सीधे-सच्चे।।
यह हैं नित्य नियम से न्हाते।
खुश होकर साबुन मलवाते।। 

बाँध चेन में इनको लाते।
बाबा कंघी से सहलाते।।
IMG_1731इन्हे नहीं कहना बाहर के।
संगी-साथी ये घरभर के।।

सुन्दर से हैं बहुत सलोने।
दोनों ही हैं स्वयं खिलौने।।