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15 जुलाई, 2011

"रेंग रही हैं बहुत गिजाई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

छम-छम वर्षा आई।
रेंग रही हैं बहुत गिजाई।।
 पेड़ों की जड़ के ऊपर भी,
मिट्टी में कच्ची भूपर भी,
इनका झुण्ड पड़ा दिखलाई।
ईश्वर के कैसे कमाल हैं,
ये देखो ये लाल-लाल हैं,
सीधी-सरल बहुत हैं भाई।

कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी,
धवल-धवल तन पर हैं धारी,
कितनी सुन्दर काया पाई।