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23 अक्तूबर, 2011

"इससे साफ नज़र आता है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


जो सबके मन को भाता है।
वो ही चश्मा कहलाता है।।
 
आयु जब है बढ़ती जाती।
जोत आँख की घटती जाती।।
 
जब हो पढ़ने में कठिनाई।
ऐनक होती है सुखदाई।।
 
इससे साफ नज़र आता है।
लिखना-पढ़ना हो जाता है।।
 
जब सूरज है ताप दिखाता।
चश्मा बहुत याद तब आता।।
 
तेज धूप से यह बचाता।
आँखों को ठण्डक पहुँचाता।।