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22 नवंबर, 2011

"बेटी कुदरत का उपहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


बिटियारानी कितनी प्यारी।
घर भर की है राजकुमारी।।

भोली-भाली सौम्य-सरल है।
कलियों जैसी यह कोमल है।।

देवी जैसी पावन सूरत।
ममता की है जीवित मूरत।।

बेटी कुदरत का उपहार।
आओ इसको करें दुलार।।