मूस जी मुसटन्डा...
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मूस जी मुसटन्डा-कृष्णेश्वर डींगर
मूस ही मुस्टंडा,लिये हाथ में डंडा।
बिल्ली बोली म्याऊँ,किस चूहे को खाऊँ।
मूस ही मुस्टंडा,गिरा हाथ से डंडा।
बिल्ली जी ...
14 घंटे पहले
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19 comments:
बेटियाँ वाकई कुदरत का बेहतरीन उपहार हैं.
सुन्दर रचना.
उत्तम भावों की गहन अभिव्यक्ति
कुदरत का बेहतरीन उपहार बेटियाँ होती है काश ये बात सबको समझ आ जाये।
इसमें कोई संदेह नहीं कि बेटियाँ कुदरत का अनुपम उपहार है, कविता में आपने भाव विह्वल कर दिया, बहुत ही सुन्दर रचना है यह,बधाईयाँ !
बेटियाँ वाकई कुदरत की उपहार हैं
सुन्दर रचना
बेटियां सच में कुदरत का अनमोल तोहफा होती हैं....
सुंदर रचना।
कुदरत के बेहतरीन उपहार बेटी पर लिखी यह रचना मन को छूती है।
♥
आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी
सादर प्रणाम !
बेटी कुदरत का उपहार।
आओ इसको करें दुलार।।
बहुत सुंदर रचना है …
बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार
कोई संदेह नहीं शत प्रतिशत सहमत अच्छी रचना
बहुत ही सुन्दर है यह कविता|
बहुत ही प्यारी सी कविता.
सुन्दर रचना
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bahut sunder aur komal si rachna ...
बहुत ही प्यारी कविता...थैंक्यू अंकल बेटियों को इतना प्यार देने केलिए...
सच में बहुत प्यारी कविता है!
komal bhav
बेटियाँ वाकई कुदरत का बेहतरीन उपहार हैं
बहुत प्यारी रचना
बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति.
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