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11 जून, 2012

"अपनी ओर लुभाते आम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


 
एक साल में आते आम।
सबके मन को भाते आम।।

जब वर्षा से आँगन भरता,
स्वाद बदलने को जी करता,
तब पेड़ों पर आते आम।
सबके मन को भाते आम।।

चटनी और अचार बनाओ,
पक जाने पर काटो-खाओ,
आम सभी के होते आम।
सबके मन को भाते आम।।

कच्चा सबसे खट्टा होता,
पक जाने पर मीठा होता,
लंगड़ा वो कहलाते आम।
सबके मन को भाते आम।।

बम्बइया की शान निराली,
खुशबू होती है मतवाली,
अपनी ओर लुभाते आम।
सबके मन को भाते आम।।