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12 जनवरी, 2012

‘‘अद्भुत है मेथी की माया’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सब्जी है यह प्यारी-प्यारी।
मेथी की महिमा है न्यारी।।

गोल-गोल पत्तों वाली है।
इसमें कितनी हरियाली है।।

घोट-पीसकर साग बनाओ।
या आलू संग इसे पकाओ।।

यकृत को ताकत यह देगी।
तन के सभी रोग हर लेगी।।


इसे लगाओ घर-आँगन में।
महक उगेगी यह उपवन में।।

अद्भुत है मेथी की माया।
करती यह निरोगी काया।।