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12 जनवरी, 2012

‘‘अद्भुत है मेथी की माया’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सब्जी है यह प्यारी-प्यारी।
मेथी की महिमा है न्यारी।।

गोल-गोल पत्तों वाली है।
इसमें कितनी हरियाली है।।

घोट-पीसकर साग बनाओ।
या आलू संग इसे पकाओ।।

यकृत को ताकत यह देगी।
तन के सभी रोग हर लेगी।।


इसे लगाओ घर-आँगन में।
महक उगेगी यह उपवन में।।

अद्भुत है मेथी की माया।
करती यह निरोगी काया।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. methi ki maaya , vaah vaah , aur aapki maya hai har topic par kavita rach dena ....

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  2. और मेथी के पराँठे -हरी मिर्चवाले.
    क्या दिव्य स्वाद !

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  3. वाह छोटे छोटे आलू और भीनी भीनी मेथी का जवाब नहीं

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  4. बहुत सुन्दर... मैथी के पराठे..

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  5. बच्चों को मेथी जरूर आकर्षित करेगी अब तो ..

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  6. अपूर्व!
    इससे पहले मेथी पर
    मैंने कभी कोई कविता नहीं पढ़ी!

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  7. बहुत सुंदर गुणकारी कविता...
    स्वस्थ नीरोगी
    सबके मन भाते
    मेथी पराठे|

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  8. आदरणीय शास्त्री जी ..सुन्दर सन्देश देती बाल रचना मधुमेह में भी रामबाण है यह मेथी ...
    आभार
    भ्रमर ५

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  9. बहुत ही सरल ढंग से मेथी का गुणगान .. और ऐसा कि जिसे बच्चे बच्चे याद कर लें .. वाकई मेथी बहुत ही लाभदायक है

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