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11 अक्तूबर, 2010

“भार उठाता, गधा कहाता” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



कितना सारा भार उठाता।
लेकिन फिर भी गधा कहाता।।
farmer-donkey-1 रोज लाद कर अपने ऊपर,
कपड़ों के गट्ठर ले जाता।
वजन लादने वाले को भी,
तरस नही इस पर है आता।।
donkey -3जिनसे घर में चूल्हा जलता,
उन लकड़ी-कण्डों को लाता।
जिनसे पक्के भवन बने हैं,
यह उन ईंटों को पहुँचाता।।
donkey_11यह सीधा-सादा प्राणी है,
घूटा और घास को खाता।
जब ढेंचू-ढेंचू करता है,
तब मालिक है मार लगाता।।

भार उठाता, गधा कहाता।
फिर भी नही किसी को भाता।।
(चित्र गूगल छवि से साभार)