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18 अप्रैल, 2011

"बालक हैं ये प्यारे-प्यारे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ' मयंक')

आँगन बाड़ी के हैं तारे।
बालक हैं  ये प्यारे-प्यारे।।
आओ इनका मान करें हम।
सुमनों का सम्मान करें हम।।
बाल दिवस हम आज मनाएँ।
नेहरू जी को शीश नवाएँ।।
जो थे भारत भाग्य विधाता।
बच्चों से रखते थे नाता।।
सबसे अच्छे जग से न्यारे।
बच्चों के हैं चाचा प्यारे।।