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"यह है अपना सच्चा भारत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

>> 19 September, 2011

♥ यह है अपना सच्चा भारत ♥
सुन्दर-सुन्दर खेत हमारे।
बाग-बगीचे प्यारे-प्यारे।।

पर्वत की है छटा निराली।
चारों ओर बिछी हरियाली।।
सूरज किरणें फैलाता है।
छटा अनोखी बिखराता है।।

तम हट जाता, जग जगजाता।
जन दिनचर्या में लग जाता।।

चहक उठे हैं घर-चौबारे।
महक उठे कच्चे-गलियारे।।
गइया जंगल चरने जाती।
हरी घास मन को ललचाती।।

 नहीं बनावट, नहीं प्रदूषण।
यहाँ सरलता है आभूषण।।
खड़ी हुई मजबूत इमारत।
यह है अपना सच्चा भारत।।

19 comments:

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" 19 सितम्बर 2011 5:31 pm  

kya bat hai jnab dil hi jit liya aapne to iqbaal shaayr ko bhi pichhe chhod diyaa jnaab badhaai ho .akhtar khan akela kota rajsthan

Pallavi 19 सितम्बर 2011 6:25 pm  

बहुत खूबसूरत कविता है आपकी, मगर अफसोस की अब यह पंक्तियाँ महज़ पंक्तियाँ ही रह गई है
नहीं बनावट, नहीं प्रदूषण।
यहाँ सरलता है आभूषण।।
माफ कीजिएगा जो लगा वो कह दिया...

Rajesh Kumari 19 सितम्बर 2011 6:37 pm  

achchi sulabh saloni baal kavita.

Suresh kumar 19 सितम्बर 2011 7:08 pm  

bahut hi sundar ....

श्रीमती रजनी माहर 19 सितम्बर 2011 7:22 pm  

natural pure natural.........thanks..a..lot.....

रावेंद्रकुमार रवि 19 सितम्बर 2011 7:44 pm  

बहुत बढ़िया!

Dr. Ayaz Ahmad 19 सितम्बर 2011 8:04 pm  

Nice post.

Dr. Ayaz Ahmad 19 सितम्बर 2011 8:04 pm  

Nice post.

मधुर गुंजन 19 सितम्बर 2011 10:27 pm  

तम हट जाता, जग जगजाता।
जन दिनचर्या में लग जाता।।
बहुत खूब...

Kunwar Kusumesh 20 सितम्बर 2011 10:23 am  

सरल शब्दों में, आसानी से ग्राह्य और देश प्रेम से ओत प्रोत सुन्दर रचना है.

"रुनझुन" 20 सितम्बर 2011 12:50 pm  

बहुत सुन्दर कविता!!! मन को भाती प्यारी कविता!!!

Arunesh c dave 20 सितम्बर 2011 12:51 pm  

सरलता से बात कह देना ही आपकी खासियत है

रेखा 20 सितम्बर 2011 4:27 pm  

सही है ....यही तो है अपना भारत

वन्दना 20 सितम्बर 2011 5:42 pm  

सच्चे भारत का बहुत खूबसूरत चित्र खींचा है।

mrityunjay kumar rai 20 सितम्बर 2011 6:44 pm  

तस्वीरें बहुत अच्छी है , कविता भी

vidhya 20 सितम्बर 2011 7:39 pm  

बहुत खूबसूरत कविता है आपकी,

Maheshwari kaneri 20 सितम्बर 2011 9:21 pm  

मन को भाती प्यारी कविता!!!

Patali-The-Village 21 सितम्बर 2011 7:07 pm  

यही तो है अपना खूबसूरत भारत|

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri 29 सितम्बर 2011 4:54 pm  

मनभावन बाल कविता....शुभ कामनाएं डा० साहब

"चुराइए मत! अनुमति लेकर छापिए!!

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