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26 मार्च, 2014

"नन्हे सुमन की वन्दना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति "नन्हें सुमन" से
नन्हे सुमन की वन्दना
  
तान वीणा की सुनाओ कर रहे हम कामना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

अब ध्ररा पर ज्ञान की गंगा बहाओ,
तम मिटाकर सत्य के पथ को दिखाओ,
लक्ष्य में बाधक बना अज्ञान का जंगल घना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

बेसुरे से राग मेंअनुराग भर दो,
फँस गये हैं हम भँवर मेंपार कर दो,
शारदे माँ कुमति हरकर सबको मेधावी बना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

वन्दना है आपसेरसना में रस की धार दो,
हम निपट अज्ञानियों को मातु निज आधार दो,
माँ हमें वरदान दोहोवें सफल सब साधना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।