कविता : आधी आजादी
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आधी आजादी
हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओ...
6 घंटे पहले
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11 comments:
चुराने का मन हो रहा है लेकिन आपने मना कर रखा है........
लीची देखकर तो मुह में पानी आ गया , लीची पर कविता सुन्दर है
Saamyik, bahut sundar
nice
कविता और कविता का सचित्र प्रस्तुति..लाज़वाब शास्त्री जी..सुंदर कविता के लिए बधाई
चित्र और कविता ..दोनों ही बेमिसाल....
लीची देख सबका मन ललचाया
आज तो सबका मन ललचा दिया………………बहुत सुन्दर कविता।
लीची के गुच्छे मन भाए!
इन्हें देखकर मन ललचाए!!
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बौराए हैं बाज फिरंगी!
जन्म-दिवस पर मिला : मुझे एक अनमोल उपहार!
सुन्दर सुन्दर प्यारी प्यारी मीठी मीठी लीची देखकर तो मुँह में पानी आ गया! अब तो रहा नहीं जा रहा है तुरंत खाने का मन कर रहा है! तस्वीर के साथ साथ बहुत ही प्यारी रचना!
मनभावन होने के कारण
चर्चा मंच पर
इंद्रधनुष के सात रंग मुस्काए!
शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!
बहुत सुन्दर..मुँह में पानी आ गया...
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'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है !!
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