कविता : आधी आजादी
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आधी आजादी
हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओ...
4 घंटे पहले
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8 comments:
bahut sundar chitron ke sath
aam khane ka man ho gaya
http://sanjaykuamr.blogspot.com/
nice
बहुत सुन्दर , आम देख कर मुह में पानी आ गया
वाह...इतने सारे आम?????/ कविता बहुत रसीली लगी...
paanee me nahaate hue baalako se yaad aayaa
hamne bhee kabhee aisee mastee khoob leenee hai
इतने सुन्दर तस्वीरें और ढेर सारे आम देखकर तो रहा नहीं जा रहा है! गर्मी के मौसम में आम खाने का मज़ा ही कुछ और है!
वाह !
स्वाद आ गया ...........
क्यों बालक के मन को ललचा रहे हैं सर.. यहाँ कहाँ मिलेंगे रसीले दशहरी आम.. :(
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