कविता : आधी आजादी
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आधी आजादी
हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओ...
4 घंटे पहले
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12 comments:
उम्दा प्रस्तुती और तस्वीर / सराहनीय कविता /हम चाहते हैं की इंसानियत की मुहीम में आप भी अपना योगदान दें / पढ़ें इस पोस्ट को और हर संभव अपनी तरफ से प्रयास करें http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/2010/05/blog-post_20.html
bahut sundar!
bahut hi sundar chitrmay prastuti.
अरे वाह, ये तितली तो बडी प्यारी है।
इसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है।
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क्या हमें ब्लॉग संरक्षक की ज़रूरत है?
नारीवाद के विरोध में खाप पंचायतों का वैज्ञानिक अस्त्र।
नन्हे सुमन के पचासवें पुष्प के लिए बधाई ...
और कविता तो हमेशा की तरह बहुत प्यारी है...
इस कविता में निहित हितकारी भावनाएँ
इसको उच्च स्थान दिलाने में सक्षम हैं!
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बौराए हैं बाज फिरंगी!
हँसी का टुकड़ा छीनने को,
लेकिन फिर भी इंद्रधनुष के सात रंग मुस्काए!
और हाँ ... ... .
नन्हे सुमन के इक्यावनवें सुमन के लिए
आपको बहुत-बहुत बधाई!
ताजादम जब हो जाओगी!
पंख हिलाती उड़ जाओगी!!
सीख देती अच्छी बाल रचना
रे वाह, ये तितली तो बडी प्यारी है।
तितली रानी के क्या कहने...सुन्दर बाल-गीत.
ये तो बड़ी प्यारी तितली रानी है...मनभावन.
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'पाखी की दुनिया' में 'अंडमान में आए बारिश के दिन'
ख़ूबसूरत चित्र के साथ उम्दा प्रस्तुती! तितली बहुत प्यारी होती है और सबके मन को भाति है!
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