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27 सितंबर, 2010

"मुर्गें की सीख:दीन दयाल शर्मा" (प्रस्तोता-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


मुर्गा बोला नहीं जगाता
अब तुम जागो अपने आप।
कितनी घडियाँ और मोबाइल
रखते हो तुम अनाप-शनाप।

मैं भी जगता मोबाइल से
तुम्हें जगाना मुश्किल है
कब से जगा रहा हूँ तुमको
तू क्या मेरा मुवक्किल है।

समय पे सोना, समय पे जगना
जो भी करेगा समय पे काम
समय बड़ा बलवान जगत में
समय करेगा उसका नाम।

--------

दीन दयाल शर्मा (बाल साहित्यकार)

अध्यक्ष,
राजस्थान साहित्य परिषद्
हनुमानगढ़ संगम-335512
mob. 9414514666

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूबसूरती के साथ शब्दों को पिरोया है इन पंक्तिया में आपने .......

    पढ़िए और मुस्कुराइए :-
    आप ही बताये कैसे पार की जाये नदी ?

    जवाब देंहटाएं
  2. समय पे सोना, समय पे जगना
    जो भी करेगा समय पे काम
    समय बड़ा बलवान जगत में
    समय करेगा उसका नाम।

    ...कित्ती प्यारी कविता और सुन्दर सन्देश भी !!

    जवाब देंहटाएं
  3. श्रद्देय डॉ.मयंक साहब, आपने "नन्हे सुमन" ब्लॉग में मेरी कविता "मुर्गे की सीख " प्रकाशित की है..इसके लिए आपका और टिप्पणीदाताओं का हृदय से आभार...

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर बाल गीत्।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत ख़ूबसूरत और प्यारा बाल गीत !

    जवाब देंहटाएं
  6. अरे वाह कितनी सुंदर कविता और अच्छी सीख भी दे रही है.....

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर रचना ....आपका और शर्मा अंकलजी दोनों का बहुत आभार
    नन्ही ब्लॉगर
    अनुष्का

    जवाब देंहटाएं

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