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03 मई, 2011

“मन खुशियों से फूला” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

parrotउमस भरा गरमी का मौसम,
तन से बहे पसीना!
कड़ी धूप में कैसे खेलें,
इसने सुख है छीना!!


कुल्फी बहुत सुहाती हमको,
भाती है ठण्डाई!
दूध गरम ना अच्छा लगता,
शीतल सुखद मलाई!!
पंखा झलकर हाथ थके जब,
हमने झूला झूला!
ठण्डी-ठण्डी हवा लगी तब,
मन खुशियों से फूला!!