यह ब्लॉग खोजें

लोड हो रहा है. . .

समर्थक

"कुमुद का फोटोफीचर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

>> 29 May, 2011

फोटो फीचर
बच्चों तुम धोखा मत खाना!
कमल नहीं इनको बतलाना!!
शाम ढली तो ये ऐसे थे।
दोनों बन्द कली जैसे थे।।
जैसे-जैसे हुआ अंधेरा।
खुलता गया कली का चेहरा।।
बढ़ती रही सरल मुस्कानें।
रूप अनोखा लगीं दिखाने।।
 अब पंखुड़ियाँ थीं फैलाई।
देख कुमुदिनी थी शर्मायी।
दोनों ने जब नज़र मिलाई।
अपनी मोहक छवि दिखलाई।।
अन्धकार अब था गहराया।
कुमुद खुशी से था लहराया।। 
एक रूप है एक रंग है!
कमल-कुमुद के भिन्न ढंग हैं।। 
कमल हमेशा दिन में खिलता।
कुमुद रात में हँसता मिलता।।

26 comments:

वन्दना 29 मई 2011 12:54 pm  

वाह वाह ……………आनन्द आ गया देखकर और उसके साथ आपकी रसमयी कविता पढकर्।

संगीता स्वरुप ( गीत ) 29 मई 2011 1:33 pm  

बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी अच्छी जानकारी देती खूबसूरत रचना ..

Archana 29 मई 2011 2:11 pm  

achha laga kamal-kumud se milakar

(कुंदन) 29 मई 2011 2:54 pm  

बहुत ही सुंदर है तस्वीरे और कविता दोनों ही .... इसका प्रिंट ले कर रखूंगा मेरी बेटी जब थोड़ी बड़ी होगी तो उसे दूंगा

वन्दना 29 मई 2011 3:03 pm  

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (30-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

संध्या शर्मा 29 मई 2011 3:20 pm  

तस्वीरे और कविता दोनों ही बहुत सुंदर है ...

shikha varshney 29 मई 2011 3:20 pm  

वाह बहुत ही सुन्दर तस्वीरें हैं

Kunwar Kusumesh 29 मई 2011 3:35 pm  

कुमुद के खिलने के एक एक stage पर सरल शब्दों में कविता कहना आपके ही बस की बात है. मज़ा आ गया.

नीरज जाट 29 मई 2011 4:15 pm  

बहुत बढिया फोटो फीचर

डा. श्याम गुप्त 29 मई 2011 4:20 pm  

वाह ! शास्त्रीजी...धन्य हैं आप----क्या सुन्दर अन्तर बतलाया है....कुछ बाल गीत वाले रवीश जी को भी बतलाइये जो रात में कमल खिलाते हैं...

--बहुत ही सुन्दर व सार्थक बाल-गीत...आभार

Patali-The-Village 29 मई 2011 6:14 pm  

कविता और चित्र दोनों बहुत सुन्दर हैं| धन्यवाद|

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) 29 मई 2011 6:22 pm  

और कुमुद का यह अंतर हमें भी नहीं पता था.
चित्रों के साथ आपकी यह सरस कविता बच्चों के (सभी के ) ज्ञानवर्धन लिए बहुत उपयोगी है.

सादर

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" 29 मई 2011 6:36 pm  

आपने कविता और चित्र द्वारा कमल और कुमुद में जो फर्क बताएं है वो सराहनीय है !

DR. ANWER JAMAL 29 मई 2011 7:02 pm  

कुमुद के खिलने के एक एक stage पर सरल शब्दों में कविता कहना आपके ही बस की बात है. मज़ा आ गया.
Sach kaha .

Babli 29 मई 2011 8:32 pm  

ख़ूबसूरत तस्वीरों के साथ ख़ूबसूरत रचना पढ़कर मन ख़ुशी से भर गया!

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' 29 मई 2011 8:56 pm  

शब्द कोशों में कमल के पर्यायवाची शब्दों में कमलिनी, कुमुद, कुमुदिनी, सूर्यमुखी और शशिमुखी भी हैं. मुझे इन नामों को लेकर भ्रम होता था. आज स्थिति स्पष्ट हुई.
कुमुद-कुमुदिनी आकार में छोटे-बड़े और रात में खिलते होंगे तभी शशिमुखी कहे गए.
कमल-कमलिनी आकार में छोटे-बड़े और दिन में खिलते होंगे इसलिए सूर्यमुखी कहे गए.
आपका आभार शत-शत.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" 29 मई 2011 9:08 pm  

wah wah khoobsurat chitran malik...

Udan Tashtari 29 मई 2011 9:22 pm  

वाह!! इसी बहाने ज्ञानवर्धन भी कर दिया...सुन्दर.

चैतन्य शर्मा 29 मई 2011 10:21 pm  

बहुत सुंदर फोटो और अच्छी जानकरी....

रावेंद्रकुमार रवि 30 मई 2011 12:22 am  

रवीश जी तो कभी भी
और कहीं भी कमल खिला सकते हैं!
--
डॉ. श्याम गुप्त जी जिस दिन यह बात समझ जाएँगे,
उस दिन उनको सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने की समझ भी आ जाएगी!
--
शास्त्री जी मुझे क्या बताएँगे?
मैं ही उनको अपने साथ यह अनोखी प्राकृतिक घटना
दिखाने के लिए ले गया था!
--
ये सारे फ़ोटो उन्होंने मेरे साथ ही खींचे हैं
और से सारी जानकारी भी उन्हें मुझसे ही मिली है!

Anjana (Gudia) 30 मई 2011 6:26 am  

उत्कृष्ट! बेहद सुंदर प्रस्तुति

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 30 मई 2011 6:39 am  

टिप्पणीदातोओं का आभार!
देखते हैं कि आभासी दुनिया के लोगों के अहम् का द्वन्द्व कहाँ तक जाता है!

Rajesh Kumari 30 मई 2011 8:09 am  

shastri ji is blog par pahli bar aai hoon.bahut pyara blog hai ye to.kumudni ke vishay me bhi jankaari mili.nanhe nanhe bachchon ke liye aap bahut upyogi rachnaayen likh rahe hain,bahut prerna dayak hain.aabhar.

Chinmayee 30 मई 2011 8:15 am  

बहुत लुभावने फोटो और सुंदर रचना

बाबुषा 30 मई 2011 3:01 pm  

कुमुद के बारे में ये बात मुझे भी नहीं पता थी ..रात में खिलने वाली ! मेरे जैसे शिशु के लिए परफेक्ट शिशु गीत ! :-) बहुत मज़ा आया !

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" 1 जून 2011 6:49 pm  

बहुत ही सुन्दर रचना ..

"चुराइए मत! अनुमति लेकर छापिए!!

Protected by Copyscape Online Infringement Software

Footer

अब मेरे सभी ब्लॉग्स blogspot.com पर आ गये हैं!
(उच्चारण)
http://uchcharan.blogspot.in
/
(शब्दों का दंगल)http://uchcharandangal.
blogspot
.in/
(नन्हे सुमन)http://nicenice-nice.
blogspot
.in/
(बाल चर्चा
मंच)
(चर्चा मंच)http://charchamanch.
blogspot
.in/
(ब्लॉगमंच)http://blogsmanch.blogspot.in/
(अमरभारती)http://bhartimayank.
blogspot
.in/
(हर्ष-आदित्य)http://harshaditya.blogspot.in/

ई-मेल- roopchandrashastri@gmail.com

बच्चों के बलॉग

  © Blogger templates Romantico by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP