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14 अक्तूबर, 2013

"गांधी टोपी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से
एक बाल कविता
"गांधी टोपी"


गंजापन ढकने मेरीको टोपी, 

मेरे सिर पर रहती है।
ठिठुरन से रक्षा करती हूँ , 

बार-बार यह कहती है।। 
  
देखो अपनी गाँधी टोपी, 
सारे जग से न्यारी है।
आन-बान भारत की है ये, 

हमको लगती प्यारी है।।


लालबहादुर और जवाहर जी ने, 
इसको धार लिया।
भारत का सिंहासन इनको, 

टोपी ने उपहार दिया।।


टोपी पहिन सुभाषचन्द्र,
लाखों में पहचाना जाता।
टोपी वाले नेता का कद, 

ऊँचा है माना जाता।। 


खादी की टोपी, धोती, कुर्ते, 
की शान निराली है।  
बिना पढ़े ही ये पण्डित, 
का मान दिलाने वाली है।।  

टोपी पहन सलामी, 

अपने झण्डे को हम देते हैं। 
राष्ट्र हेतु मर-मिटने का प्रण, 
हम खुश होकर लेते है।।