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18 अक्तूबर, 2013

"एक मदारी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से
एक बाल कविता
"एक मदारी"


देखो एक मदारी आया।
 अपने संग लाठी भी लाया।।

डम-डम डमरू बजा रहा है।
भालू, बन्दर नचा रहा है।।

म्बे काले बालों वाला।
भालू का अन्दाज निराला।।

खेल अनोखे दिखलाता है।
बच्चों के मन को भाता है।।
bear&monkey 
वानर है कितना शैतान।
पकड़ रहा भालू के कान।।

यह अपनी धुन में ऐँठा है।
भालू के ऊपर बैठा है।।

लिए कटोरा पेट दिखाता।
माँग-माँग कर पैसे लाता।।