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28 जून, 2011

"प्रांजल की साइकिल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मेरी साइकिल कितनी प्यारी।
यह है मेरी नई सवारी।।
अपनी कक्षा के बच्चों में,
फर्स्ट डिवीजन मैंने पाई,
खुश होकर तब बाबा जी ने,
मुझे साईकिल दिलवाई,
इसको पाकर मेरे मन में,
जगी उमंगे कितनी सारी।
यह है मेरी नई सवारी।।
अपने घर के आँगन में मैं,
सीख रहा हूँ इसे चलाना,
कितना अच्छा लगता मुझको,
टन-टन घण्टी बहुत बजाना,
हैण्डिल पकड़ो, पैडिल मारो,
नहीं चलाना इसको भारी।
यह है मेरी नई सवारी।।
बायीं ओर चलाकर इसको,
नियम सड़क के अपनाऊँगा ,
बस्ता पीछे रखकर इसको,
विद्यालय में ले जाऊँगा,
साईकिल से अब करली है,
देखो मैंने पक्की यारी।
मेरी साइकिल कितनी प्यारी।
यह है मेरी नई सवारी।।

27 जून, 2011

"टर्र-टर्र चिल्लाने वाला" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

टर्र-टर्र चिल्लाने वाला!
मेंढक लाला बहुत निराला!!
कभी कुमुद के नीचे छिपता,
और कभी ऊपर आ जाता,
जल-थल दोनों में ही रहता,
तभी उभयचर है कहलाता,
पल-पल रंग बदलने वाला!
मेंढक लाला बहुत निराला!!
लगता है यह बहुत भयानक,
किन्तु बहुत है सीधा-सादा,
अगर जरा भी आहट होती,
झट से पानी में छिप जाता,
उभरी-उभरी आँखों वाला!
मेंढक लाला बहुत निराला!!
मुण्डी बाहर करके अपनी,
इधर-उधर को झाँक रहा है,
कीट-पतंगो को खाने को,
देखो कैसा ताँक रहा है,
उछल-उछल कर चलने वाला!
मेंढक लाला बहुत निराला!!
(छायांकनःडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

15 जून, 2011

"वेबकैम की शान निराली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


वेबकैम पर हिन्दी में प्रकाशित 
"पहली बाल रचना"

 वेबकैम की शान निराली।
करता घर भर की रखवाली।।

दूर देश में छवि पहुँचाता।
यह जीवन्त बात करवाता।।

आँखें खोलो या फिर मींचो।
तरह-तरह की फोटो खींचो।

कम्प्यूटर में इसे लगाओ।
घर भर की वीडियो बनाओ।।

चित्रों से मन को बहलाओ।
खुद देखो सबको दिखलाओ।।

छोटा सा है प्यारा सा है।
बिल्कुल राजदुलारा सा है।।

मँहगा नहीं बहुत सस्ता है।
तस्वीरों का यह बस्ता है।।

नवयुग की यह है पहचान।
वेबकैम है बहुत महान।।

05 जून, 2011

"वृक्ष अमूल्य धरोहर हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष
रहता वन में और हमारे,
संग-साथ भी रहता है।
यह गजराज तस्करों के,
जालिम-जुल्मों को सहता है।।
समझदार है, सीधा भी है,
काम हमारे आता है।
सरकस के कोड़े खाकर,
नूतन करतब दिखलाता है।।
मूक प्राणियों पर हमको तो,
तरस बहुत ही आता है।
इनकी देख दुर्दशा अपना,
सीना फटता जाता है।।

वन्य जीव जितने भी हैं,
सबका अस्तित्व बचाना है,
जंगल के जीवों के ऊपर,
दया हमें दिखलाना है।
वृक्ष अमूल्य धरोहर हैं,
इनकी रक्षा करना होगा।
जीवन जीने की खातिर,
वन को जीवित रखना होगा।

तनिक-क्षणिक लालच को,
अपने मन से दूर भगाना है।
धरती का सौन्दर्य धरा पर,
हमको वापिस लाना है।।

04 जून, 2011

"घर भर की तुम राजदुलारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


प्यारी-प्यारी गुड़िया जैसी,
बिटिया तुम हो कितनी प्यारी।
मोहक है मुस्कान तुम्हारी,
घर भर की तुम राजदुलारी।।

नये-नये परिधान पहनकर,
सबको बहुत लुभाती हो।
अपने मन का गाना सुनकर,
ठुमके खूब लगाती हो।।
निष्ठा तुम प्राची जैसी ही,
चंचल-नटखट बच्ची हो।
मन में मैल नहीं रखती हो,
देवी जैसी सच्ची हो।।

दिनभर के कामों से थककर,
जब घर वापिस आता हूँ।
तुमसे बातें करके सारे,
कष्ट भूल मैं जाता हूँ।।

मेरे घर-आगँन की तुम तो,
नन्हीं कलिका हो सुरभित।
हँसते-गाते देख तुम्हें,
मन सबका हो जाता हर्षित।।

29 मई, 2011

"कुमुद का फोटोफीचर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

फोटो फीचर
बच्चों तुम धोखा मत खाना!
कमल नहीं इनको बतलाना!!
शाम ढली तो ये ऐसे थे।
दोनों बन्द कली जैसे थे।।
जैसे-जैसे हुआ अंधेरा।
खुलता गया कली का चेहरा।।
बढ़ती रही सरल मुस्कानें।
रूप अनोखा लगीं दिखाने।।
 अब पंखुड़ियाँ थीं फैलाई।
देख कुमुदिनी थी शर्मायी।
दोनों ने जब नज़र मिलाई।
अपनी मोहक छवि दिखलाई।।
अन्धकार अब था गहराया।
कुमुद खुशी से था लहराया।। 
एक रूप है एक रंग है!
कमल-कुमुद के भिन्न ढंग हैं।। 
कमल हमेशा दिन में खिलता।
कुमुद रात में हँसता मिलता।।

27 मई, 2011

"स्वागत गीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


लगभग 26 वर्ष पूर्व मैंने एक स्वागत गीत लिखा था। 
यह मेरा सौभाग्य है कि उत्सवों में आज भी 
क्षेत्र के विद्यालयों में इसको गाया जा रहा है!
स्वागतम आपका कर रहा हर सुमन।
आप आये यहाँ आपको शत नमन।।

भक्त को मिल गये देव बिन जाप से,
धन्य शिक्षा-सदन हो गया आपसे,
आपके साथ आया सुगन्धित पवन।
आप आये यहाँ आपको शत नमन।।

हमको सुर, तान, लय का नही ज्ञान है,
गलतियाँ हों क्षमा हम तो अज्ञान हैं,
आपका आगमन, धन्य शुभ आगमन।
आप आये यहाँ आपको शत नमन।।

अपने आशीष से धन्य कर दो हमें,
देश को दें दिशा ऐसा वर दो हमें,
अपने कृत्यों से लायें, वतन में अमन।
आप आये यहाँ आपको शत नमन।।

दिल के तारों से गूँथे सुमन हार कुछ,
मंजु-माला नही तुच्छ उपहार कुछ,
आपको हैं समर्पित हमारे सुमन।
आप आये यहाँ आपको शत नमन।।

स्वागतम आपका कर रहा हर सुमन।
आप आये यहाँ आपको शत नमन।।
स्वागतम-स्वागतम, स्वागतम-स्वागतम!!