कविता : आधी आजादी
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आधी आजादी
हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओ...
7 घंटे पहले
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7 comments:
Badhiya baal kavita,
बहुत सुन्दर... मैंने तो जोड़-तोड़ कर चार लाइनें लिखी थीं लेकिन आपने बहुत बढ़िया कविता की रचना की..
अंत दुखद था जो थोड़ा सा निराश कर रहा है , जो मधुमखियाँ हमें इतना सारा शहद देती है हम उन्हें उजाड़ क्यों देते है
wah kavita k pravaah ke sath sath jo sandesh chhipa hai kavita me laajawab hai.
behad khoobsoorat sandesh deti manmohak kavita.
"इक दिन डाका पड़ जायेगा।
शहद-मोम सब उड़ जायेगा।।"
बड़ी सादगी से सार्थक संदेश
दिया है ...... बधाई।
सद्भावी- डॉ० डंडा लखनवी
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बहुत बढ़िया बाल-गीत लिखाआपने..बधाई.
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