कविता : आधी आजादी
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आधी आजादी
हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओ...
5 घंटे पहले
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13 comments:
वाह्…………आमों के माध्यम से ज़िन्दगी का खाका खूब खींचा है।
आम तो बहुत खट्टे हैं लाख कोशिस करने पर एक को भी हाथ न लगा सका पर हम कब से अपने बलाग पर आपके आशीर्वाद की राह देख रहे हैं आप हैं कि आते ही नहीं।
बहुत सुन्दर
पसंद के चटके के साथ आपका धन्यावाद जी
nice
बहुत सुंदर भाव लिए कविता |बधाई
आशा
waah waah..!!
mera bhi dil kar raha hai khaane ko
haan nahi to..!
अच्छी सीख नन्हें मुन्नों को.
बहुत सुन्दर...मन को छू गयी ये रचना...
सन्देश देती हुई ...
सुन्दर भाव के साथ दिल को छू लेने वाली कविता लिखा है आपने!
बहुत सुन्दर
कल मंगलवार को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है
http://charchamanch.blogspot.com/
बहुत सुन्दर
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