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01 जून, 2010

“शायद वर्षा जल्दी आये” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

टर्र-टर्र मेंढक टर्राए!
शायद वर्षा जल्दी आये!

बाजारों में आम आ गये,
अमलतास पर फूल छा गये,
लेकिन बारिस नजर न आये!

टर्र-टर्र मेंढक टर्राए!
शायद वर्षा जल्दी आये!

सूख गये सब ताल-तलैय्या, 
छोटू कहाँ चलाए नैय्या!
सबको गर्मी बहुत सताए!

टर्र-टर्र मेंढक टर्राए!
शायद वर्षा जल्दी आये!