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16 नवंबर, 2013

"वानर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से

एक बालकविता
"वानर"


जंगल में कपीश का मन्दिर। 
जिसमें पूजा करते बन्दर।। 

कभी यह ऊपर को बढ़ता। 
डाल पकड़ पीपल पर चढ़ता।। 

ऊपर जाता, नीचे आता। 
कभी न आलस इसे सताता।। 
उछल-कूद वानर करता है। 
बहुत कुलाँचे यह भरता है।।