यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

03 नवंबर, 2013

"टॉम-फिरंगी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से
एक बाल कविता
"टॉम-फिरंगी"
टॉम-फिरंगी प्यारे-प्यारे।
दोनों चौकीदार हमारे।।

हमको ये लगते हैं अच्छे।
दोनों ही हैं सीधे-सच्चे।।
जब हम इनको हैं नहलाते।
ये खुश हो साबुन मलवाते।।  

बाँध चेन में इनको लाते।
बाबा कंघी से सहलाते।।
IMG_1731
इन्हें नहीं कहना बाहर के।
संगी-साथी ये घरभर के।।

ये दोनों हैं बहुत सलोने।
सुन्दर से जीवन्त खिलौने।।