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27 जनवरी, 2014

"बकरे बकरी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


मेरी बालकृति नन्हें सुमन से
बालकविता
"बकरे बकरी"
इस बाल-कविता को सुनिए-
अर्चना चावजी के स्वर में-
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रबड़ प्लाण्ट का वृक्ष लगा है,
मेरे घर के आगे!
पत्ते खाने बकरे-बकरी,
आये भागे-भागे!
 
हुए बहुत मायूसधरा पर
पत्ता कोई न पाया!
इन्हे उदास देखकर मैंने,
अपना हाथ बढ़ाया!!

झटपट पत्ता तोड़ पेड़ से,
हाथों में लहराया!
इन भोले-भाले जीवों का,
मन था अब ललचाया!!
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आँखों में आशा लेकर,
सब मेरे पास चले आये!
उचक-उचककर बड़े चाव से
सबने पत्ते खाये!!

दुनिया के जीवों का,
यदि तुम प्यार चाहते पाना!
भूखों को सच्चे मन से
तुम भोजन सदा खिलाना!!

7 टिप्‍पणियां:

  1. जानवर तो प्यार के भूखे होते हैं ...
    अच्छी बाल रचना है ... नमस्कार शास्त्री जी ...

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  2. बहुत प्यारी कविता

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