‘‘हमारा सूरज’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘‘मयंक’’)
>> 04 April, 2010
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नही किसी से भेद-भाव और वैर कभी रखता है,
सूर्य उदय होने पर जीवों में जीवन आता है, |
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नही किसी से भेद-भाव और वैर कभी रखता है,
सूर्य उदय होने पर जीवों में जीवन आता है, |
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7 comments:
बहुत सुन्दर, सहज कविता, हमेशा की तरह.
बेहतरीन। लाजवाब।
aap hamare sahitya jagat ke suraj he jo ham sab par andhkari agayanta par satya ka prakash dal rahe he
aap ko badhai
bahut achi kavita he ye
बेहतरीन।
मनमोहक और ख़ूबसूरत ! बहुत ही सुन्दरता से आपने प्रस्तुत किया है!
nice
sundar , sargarbhit , sahaj aur ek behtreen kavita.
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