कविता : आधी आजादी
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आधी आजादी
हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओ...
8 घंटे पहले
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2 comments:
likhna padhna jaroori bhi to hai na ....................bahut hi sundar kavita.
तन्दरुस्ती के लिए खेलना,
सबको बहुत जरूरी है।
किन्तु परीक्षा की खातिर,
पढ़ना-लिखना मजबूरी है।।
दोनों ही बाते जरूरी है , बढ़िया बाल कविता !
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