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“बाल कविता:समीर लाल (उड़नतश्तरी)”

>> 21 April, 2010

“गर्मी की छुट्टी”
-समीर लाल ’समीर’
गर्मी की छुट्टी

कर ली हमने खूब पढ़ाई
पढ़कर के आँखें खुजलाई
लिखी परीक्षा मेहनत कर के
तब गर्मी की छुट्टी आई.



अब होगा बस खेल तमाशा
सुबह शाम को धूम धमाका
सब बच्चे घर में खेलेंगे
धूप भला हम क्यूँ झेलेंगे..

पापा संग जा कुल्फी खाई
जब गर्मी की छुट्टी आई.



दिन भर खूब कहानी पढ़ते
आपस में हम नहीं झगड़ते
कार्टून टी.वी. पर आया
बच्चों ने मन को बहलाया..

मौसी हमसे मिलने आई
जब गर्मी की छुट्टी आई.



दीदी से कम्प्यूटर सीखा
हमें लगा वो स्वप्न सरीखा
पलक झपकते सब बतलाता
दुनिया भर की सैर कराता..

समय उड़ा बन हवा हवाई
जब गर्मी की छुट्टी आई.



-समीर लाल ’समीर’

13 comments:

विवेक सिंह 21 अप्रैल 2010 7:28 पूर्वाह्न  

बहुत अच्छी कविता है ।

"टीवी ने कार्टून दिखलाया" में 'दिखलाया' की जगह 'दिखाया' हो और भी सुर में गाई जा सकती है ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 21 अप्रैल 2010 7:37 पूर्वाह्न  

@ विवेक सिंह जी!
आदरणीय समीर लाल जी कह कर यह पंक्ति ठीक करा दी गई है!

Udan Tashtari 21 अप्रैल 2010 8:06 पूर्वाह्न  

विवेक का आभार सुझाव के लिए एवं शास्त्री जी का सुधार के लिए.

Sadhana Vaid 21 अप्रैल 2010 8:18 पूर्वाह्न  

बहुत प्यारी और मनभावन कविता !

वन्दना 21 अप्रैल 2010 10:45 पूर्वाह्न  

समीर जी द्वारा रचित बाल कविता बहुत ही मनभावन है……………।बधाई।

shubham sachdev 21 अप्रैल 2010 11:25 पूर्वाह्न  

समीर अंकल मुझे भी छुट्टियां होने वाली हैं , मैं भी खूब मजे करुंगा , आपकी कविता बहुत-बहुत-बहुत अच्छी लगी ........शुभम सचदेव

sangeeta swarup 21 अप्रैल 2010 3:08 अपराह्न  

समीर जी की बहुत सुन्दर बाल कविता है...गर्मी की छुट्टियों का पूरा वर्णन करती हुई ये रचना बहुत अच्छी लगी....बधाई

रावेंद्रकुमार रवि 21 अप्रैल 2010 8:51 अपराह्न  

सबसे अच्छी और महत्त्वपूर्ण बात यह है -
--
समीरलाल जी भी ने भी बच्चों के लिए
लिखना शुरू कर दिया है!
--
मुझे बहुत प्रसन्नता होगी,
यदि वे इसी तरह समय-समय पर
बच्चों को अपनी रचनाओं के उपहार देते रहें!
--
शुभकामनाएँ और बधाई!

Udan Tashtari 22 अप्रैल 2010 5:01 पूर्वाह्न  

आप सबके स्नेह का आभारी हूँ. रवि जी, मैं अवश्य प्रयास करता रहूँगा.

स्वप्निल कुमार 'आतिश' 22 अप्रैल 2010 8:41 पूर्वाह्न  

ye to pyaali pyali poem hai . :)

सीमा सचदेव 22 अप्रैल 2010 12:36 अपराह्न  

समीर जी हम आपको आमंत्रित करते हैं बच्चों की दुनिया में , आप जब बाल-रचनाओं में अपनी कलम चलाने ही लगे हैं तो बाल-जगत में आपका स्वागत है और हमारा आमंत्रण स्वीकार करेंगे तो नन्हे-मुन्ने बच्चे खुश हो जाएंगे ।सादर ....सीमा सचदेव

शास्त्री जी आशा है आप हमारा निवेदन समीर जी तक पहुंचा ही देंगे

अक्षिता (पाखी) 23 अप्रैल 2010 12:54 अपराह्न  

बहुत सुन्दर लिखा समीर अंकल जी ने ..अच्छा लगा.

************
'पाखी की दुनिया में' पुरानी पुस्तकें रद्दी में नहीं बेचें, उनकी जरुरत है किसी को !

रावेंद्रकुमार रवि 24 अप्रैल 2010 2:03 अपराह्न  

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