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21 अप्रैल, 2010

“बाल कविता:समीर लाल (उड़नतश्तरी)”

“गर्मी की छुट्टी”
-समीर लाल ’समीर’
गर्मी की छुट्टी

कर ली हमने खूब पढ़ाई
पढ़कर के आँखें खुजलाई
लिखी परीक्षा मेहनत कर के
तब गर्मी की छुट्टी आई.



अब होगा बस खेल तमाशा
सुबह शाम को धूम धमाका
सब बच्चे घर में खेलेंगे
धूप भला हम क्यूँ झेलेंगे..

पापा संग जा कुल्फी खाई
जब गर्मी की छुट्टी आई.



दिन भर खूब कहानी पढ़ते
आपस में हम नहीं झगड़ते
कार्टून टी.वी. पर आया
बच्चों ने मन को बहलाया..

मौसी हमसे मिलने आई
जब गर्मी की छुट्टी आई.



दीदी से कम्प्यूटर सीखा
हमें लगा वो स्वप्न सरीखा
पलक झपकते सब बतलाता
दुनिया भर की सैर कराता..

समय उड़ा बन हवा हवाई
जब गर्मी की छुट्टी आई.



-समीर लाल ’समीर’