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06 अप्रैल, 2010

“बिन वेतन का चौकीदार” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”

“आज मैं अपने कुत्ते “टॉम” को

कंघी कर रहा था तो

सरस पायस के सम्पादक

श्री रावेंद्रकुमार रवि ने

इसके ये प्यारे-प्यारे चित्र

मेरे कैमरे में कैद कर ही दिये!”

और बन गयी
यह प्यारी सी बाल-कविता!
टॉम हमारा कितना अच्छा!
लगता है यह सीधा सच्चा!!
IMG_1115
ठण्डे जल से रोज नहाता!
फिर मुझसे कंघी करवाता!! 
IMG_1118 बड़े-बड़े हैं इसके बाल!
एक आँख है इसकी लाल!!
IMG_1116घर भर को है इससे प्यार!
प्राची करती इसे दुलार!!
बिन वेतन का चौकीदार!
सच्चा है यह पहरेदार!!