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“बिन वेतन का चौकीदार” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”

>> 06 April, 2010

“आज मैं अपने कुत्ते “टॉम” को

कंघी कर रहा था तो

सरस पायस के सम्पादक

श्री रावेंद्रकुमार रवि ने

इसके ये प्यारे-प्यारे चित्र

मेरे कैमरे में कैद कर ही दिये!”

और बन गयी
यह प्यारी सी बाल-कविता!
टॉम हमारा कितना अच्छा!
लगता है यह सीधा सच्चा!!
IMG_1115
ठण्डे जल से रोज नहाता!
फिर मुझसे कंघी करवाता!! 
IMG_1118 बड़े-बड़े हैं इसके बाल!
एक आँख है इसकी लाल!!
IMG_1116घर भर को है इससे प्यार!
प्राची करती इसे दुलार!!
बिन वेतन का चौकीदार!
सच्चा है यह पहरेदार!!

17 comments:

रावेंद्रकुमार रवि 6 अप्रैल 2010 10:55 अपराह्न  

नवीनता लिए हुए
आज की अच्छी बाल-कविता
बहुत सरल व सरस है!

--
मेरे मन को भाई : ख़ुशियों की बरसात!
--
संपादक : सरस पायस

Mired Mirage 6 अप्रैल 2010 11:47 अपराह्न  

बहुत सुन्दर कविता और उससे भी सुन्दर टॉम है।
घुघूती बासूती

sangeeta swarup 7 अप्रैल 2010 12:13 पूर्वाह्न  

बहुत प्यारी कविता....ताम भी बहुत खूबसूरत है

अनामिका की सदाये...... 7 अप्रैल 2010 12:42 पूर्वाह्न  

sundar kavita...aur pics.bhi acchhi he.

Suman 7 अप्रैल 2010 7:06 पूर्वाह्न  

nice

'अदा' 7 अप्रैल 2010 7:51 पूर्वाह्न  

वाह वाह...!!
क्या चित्रमयी कविता..
प्राची तो बहुत क्यूट है...और टाम बड़ा छैल-छबीला लगा है...
सुन्दर ..बाल-कविता..
आभार..

ρяєєтι 7 अप्रैल 2010 10:36 पूर्वाह्न  

tom se milkar accha laga... Prachi is very cute....god bless her...

दिगम्बर नासवा 7 अप्रैल 2010 11:29 पूर्वाह्न  

सुन्दर टॉम ... सुन्दर बाल-कविता ...

अक्षिता (पाखी) 7 अप्रैल 2010 12:47 अपराह्न  

कित्ता सुन्दर लिखा है आपने..है ना. प्राची दीदी कित्ती प्यारी लग रही है और टॉमी तो पूरा शेरू लग रहा है.

_________________________
'पाखी की दुनिया' में जरुर देखें-'पाखी की हैवलॉक द्वीप यात्रा' और हाँ आपके कमेंट के बिना तो मेरी यात्रा अधूरी ही कही जाएगी !!

वन्दना 7 अप्रैल 2010 5:58 अपराह्न  

are wah.......ye to gazab ki kavita likhi hai aur uske sath lage chitra to jaise khud bol rahe hain.....prachi ko bahut bahut pyar.

Udan Tashtari 7 अप्रैल 2010 9:32 अपराह्न  

बढ़िया गीत-सच्चे पहरेदार को समर्पित!!

Babli 8 अप्रैल 2010 5:03 अपराह्न  

जितना सुन्दर कविता है उससे ज़्यादा सुन्दर तो मुझे टॉम लगा! बहुत ही प्यारा है टॉम! मुझे तो मन कर रहा है कि अभी उसे गोदी में उठाकर खूब प्यार करूँ!

JHAROKHA 9 अप्रैल 2010 4:26 पूर्वाह्न  

janvaro sebhi premkarna koi aapse seekh,bhi bahut khoob.

Akanksha~आकांक्षा 9 अप्रैल 2010 11:06 अपराह्न  

क्या खूब लिखा...मान gaye अब तो.

*********************
"शब्द-शिखर" के एक साथ दो शतक पूरे !!

दीनदयाल शर्मा 10 अप्रैल 2010 2:58 अपराह्न  

डॉ. मयंक जी ने बहुत ही सुंदर कविता लिखी है... बिन वेतन का चौकीदार...ग़जब...फोटो भी प्यारा खिंचा है...बधाई.

रावेंद्रकुमार रवि 10 अप्रैल 2010 3:14 अपराह्न  

चर्चा मंच पर
प्यारे-प्यारे, मस्त नज़ारे!
शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!

--
संपादक : सरस पायस

सीमा सचदेव 12 अप्रैल 2010 4:32 अपराह्न  

bahut pyaaree kavitaa aur chitr
मिलो अपने नए दोस्त शुभम से यहां
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