“बिन वेतन का चौकीदार” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”
>> 06 April, 2010
“आज मैं अपने कुत्ते “टॉम” को
कंघी कर रहा था तो
सरस पायस के सम्पादक
श्री रावेंद्रकुमार रवि ने
इसके ये प्यारे-प्यारे चित्र
मेरे कैमरे में कैद कर ही दिये!”
और बन गयी
यह प्यारी सी बाल-कविता!






17 comments:
नवीनता लिए हुए
आज की अच्छी बाल-कविता
बहुत सरल व सरस है!
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मेरे मन को भाई : ख़ुशियों की बरसात!
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संपादक : सरस पायस
बहुत सुन्दर कविता और उससे भी सुन्दर टॉम है।
घुघूती बासूती
बहुत प्यारी कविता....ताम भी बहुत खूबसूरत है
sundar kavita...aur pics.bhi acchhi he.
nice
वाह वाह...!!
क्या चित्रमयी कविता..
प्राची तो बहुत क्यूट है...और टाम बड़ा छैल-छबीला लगा है...
सुन्दर ..बाल-कविता..
आभार..
tom se milkar accha laga... Prachi is very cute....god bless her...
सुन्दर टॉम ... सुन्दर बाल-कविता ...
कित्ता सुन्दर लिखा है आपने..है ना. प्राची दीदी कित्ती प्यारी लग रही है और टॉमी तो पूरा शेरू लग रहा है.
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'पाखी की दुनिया' में जरुर देखें-'पाखी की हैवलॉक द्वीप यात्रा' और हाँ आपके कमेंट के बिना तो मेरी यात्रा अधूरी ही कही जाएगी !!
are wah.......ye to gazab ki kavita likhi hai aur uske sath lage chitra to jaise khud bol rahe hain.....prachi ko bahut bahut pyar.
बढ़िया गीत-सच्चे पहरेदार को समर्पित!!
जितना सुन्दर कविता है उससे ज़्यादा सुन्दर तो मुझे टॉम लगा! बहुत ही प्यारा है टॉम! मुझे तो मन कर रहा है कि अभी उसे गोदी में उठाकर खूब प्यार करूँ!
janvaro sebhi premkarna koi aapse seekh,bhi bahut khoob.
क्या खूब लिखा...मान gaye अब तो.
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"शब्द-शिखर" के एक साथ दो शतक पूरे !!
डॉ. मयंक जी ने बहुत ही सुंदर कविता लिखी है... बिन वेतन का चौकीदार...ग़जब...फोटो भी प्यारा खिंचा है...बधाई.
चर्चा मंच पर
प्यारे-प्यारे, मस्त नज़ारे!
शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!
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संपादक : सरस पायस
bahut pyaaree kavitaa aur chitr
मिलो अपने नए दोस्त शुभम से यहां
http://www.shubhamsachdeva.blogspot.com/
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