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“लैपटॉप” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

>> 16 April, 2010

“लैपटॉप”

IMG_1124
इस बस्ते में क्या है भइया,
हमें खोल कर दिखलाओ!
कहाँ चले तुम इसको लेकर,
कुछ हमको भी बतलाओ!! 

इसमें प्यारा लैपटॉप है,
छोटा सा है कम्प्यूटर!
नये जमाने का इसको ही,
हम तो कहते हैं ट्यूटर!!
IMG_1100 - Copy
जो कुछ डेस्कटॉप में होता,
वही सभी कुछ है इसमें!
चाहे कहीं इसे ले जाओ,
यही खूबियाँ हैं इसमें!!

अगर घूमने जाओ पार्क में,
संग इसे भी ले जाओ!
रेल और बस में जाओ तो,
इससे इण्टरनेट चलाओ!!

गाना सुनने का यदि मन हो,
मनचाहा तुम गीत सुनो!
देशी और विदेशी चाहे,
कैसा भी संगीत सुनो!!

इसमें छोटा माउस-पैड है,
सुन्दर सा की-बोर्ड बना है!
यह खिलौना बहुत सलोना,
मुझको इससे प्यार घना है!!

15 comments:

Shekhar kumawat 16 अप्रैल 2010 11:21 अपराह्न  

bahut khub

shandar kavita


shkaher kumawat
http://kavyawani.blogspot.com/

Suman 17 अप्रैल 2010 6:24 पूर्वाह्न  

nice

Udan Tashtari 17 अप्रैल 2010 7:08 पूर्वाह्न  

बहुत बढ़िया!

sangeeta swarup 17 अप्रैल 2010 3:23 अपराह्न  

लैपटॉप की सारी खूबियां बताता सुन्दर बाल गीत...

वन्दना 17 अप्रैल 2010 3:44 अपराह्न  

बहुत बढ़िया बाल गीत्।

रावेंद्रकुमार रवि 17 अप्रैल 2010 8:47 अपराह्न  

लैपटॉप शीर्षक से सरस पायस पर
श्री अजय गुप्त का मनभावन बालगीत
पढ़ा ही जा रहा है,
आज लैपटॉप पर आपकी भी
सुंदर बालकविता पढ़कर बहुत प्रसन्नता हुई!
--
बच्चों के लिए आपके
ये अनूठे उपहार हमेशा याद किए जाएँगे!

रावेंद्रकुमार रवि 17 अप्रैल 2010 8:52 अपराह्न  

एक बात तो रह ही गई -
प्रांजल भइया का फ़ोटो तो
बहुत बढ़िया लग रहा है!

Prem Farrukhabadi 19 अप्रैल 2010 8:54 पूर्वाह्न  

Bahut hi behtar dhang se bachchon ko jaankari deta hua baalgeet.manmohak laga.

JHAROKHA 20 अप्रैल 2010 4:38 पूर्वाह्न  

laiptop ki yah kavita
aapki badi nirali hai
jo bachcho keto man ko bhaye
badon ko bhi lage maje wali hai.
bahut hi badhiya kavita.
poonam

माधव 20 अप्रैल 2010 7:01 अपराह्न  

अच्छा है

अनामिका की सदाये...... 20 अप्रैल 2010 7:45 अपराह्न  

bahut acchhe se laptop ki khubiya bata di...jo aasaani se baccho ko samajh me aa gayi...aur hamare peechhe pad gaye ki ye to bahut acchha jadugar hai...ham b apne baste me le jaye.

अक्षिता (पाखी) 20 अप्रैल 2010 9:55 अपराह्न  

मैं तो अपने लैपटॉप पर खूब गेम खेलती हूँ.
________________
'पाखी की दुनिया' में इस बार माउन्ट हैरियट की सैर करना न भूलें !!

अभिलाषा 20 अप्रैल 2010 11:20 अपराह्न  

Bahut pyara bal geet..badhai.

अभिलाषा 20 अप्रैल 2010 11:20 अपराह्न  

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर हम प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटे रचनाओं को प्रस्तुत करेंगे.जो रचनाकार इसमें भागीदारी चाहते हैं,वे अपनी 2 मौलिक रचनाएँ, जीवन वृत्त, फोटोग्राफ भेज सकते हैं. रचनाएँ व जीवन वृत्त यूनिकोड फॉण्ट में ही हों. hindi.literature@yahoo.com

रावेंद्रकुमार रवि 24 अप्रैल 2010 2:13 अपराह्न  

उपयोगी होने के कारण
चर्चा मंच पर

झिलमिल करते सजे सितारे!

शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!

"चुराइए मत! अनुमति लेकर छापिए!!

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