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‘‘चिड़िया रानी’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

>> 16 February, 2010

बच्चों अर्थात्
नन्हीं कलियों और सुमनों को समर्पित हैः
यह
“नाइस” ब्लॉग!
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चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,
मीठा राग सुनाती हो।
आनन-फानन में उड़ करके,
आसमान तक जाती हो।।

मेरे अगर पंख होते तो,
मैं भी नभ तक हो आता।
पेड़ो के ऊपर जा करके,
ताजे-मीठे फल खाता।।

जब मन करता मैं उड़ कर के,
नानी जी के घर जाता।
आसमान में कलाबाजियाँ कर के,
सबको दिखलाता।।

सूरज उगने से पहले तुम,
नित्य-प्रति उठ जाती हो।
चीं-चीं, चूँ-चूँ वाले स्वर से ,
मुझको रोज जगाती हो।।

तुम मुझको सन्देशा देती,
रोज सवेरे उठा करो।
अपनी पुस्तक को ले करके,
पढ़ने में नित जुटा करो।।


चिड़िया रानी बड़ी सयानी,
कितनी मेहनत करती हो।
एक-एक दाना बीन-बीन कर,
पेट हमेशा भरती हो।।

अपने कामों से मेहनत का,
पथ हमको दिखलाती हो।।
जीवन श्रम के लिए बना है,
सीख यही सिखलाती हो।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

9 comments:

RaniVishal 16 फरवरी 2010 9:25 पूर्वाह्न  

बहुत ही सुन्दर है ये रचना तो ...नन्हे मुन्नो क सोभग्य है कि इस कविता के मध्यम से उन्हे जीवन का बडा ज्ञान मिल जाएगा !!
सादर
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

संगीता पुरी 16 फरवरी 2010 9:27 पूर्वाह्न  

ब्‍लॉग की साज सज्‍जा अच्‍छी लगी .. और रचना तो बहुत ही बढिया है ...

चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,
मीठा राग सुनाती हो।
आनन-फानन में उड़ करके,
आसमान तक जाती हो।।

बच्‍चों के लिए बडी प्‍यारी होती है चिडिया रानी !!

निर्मला कपिला 16 फरवरी 2010 9:48 पूर्वाह्न  

जब मन करता मैं उड़ कर के,
नानी जी के घर जाता।
आसमान में कलाबाजियाँ कर के,
सबको दिखलाता।
मंयक जी बहुत प्यारी रचना है बच्चों का क्या इसने तो हमारा भी मन बाँध लिया धन्यवाद्

वन्दना 16 फरवरी 2010 12:55 अपराह्न  

waah waah........bahut hi pyara baal geet hai......hamara bhi bachcha banne ka man ho raha hai ye geet padhkar to.

ρяєєтι 16 फरवरी 2010 4:24 अपराह्न  

Chidiya raani ka fudakna .. meri chidiya yaane meri beti ko bahut accha laga.. kahne lagi mumma ab main roz is blog ko dekhungi...

ρяєєтι 16 फरवरी 2010 4:24 अपराह्न  

Chidiya raani ka fudakna .. meri chidiya yaane meri beti ko bahut accha laga.. kahne lagi mumma ab main roz is blog ko dekhungi...

surya goyal 16 फरवरी 2010 6:01 अपराह्न  

शास्त्री जी, नमस्कार. आपके पुराने ब्लॉग पढने का तो मैं आदि हो चुका हूँ. यह नया ब्लॉग बना कर आपने जो मुझे और नन्हे-मुन्ने बच्चो पर जो अहसान किया है उसके लिए आपका आभारी हूँ. बहुत ही सुन्दर ब्लॉग. उससे ज्यादा इसमें रखी सामग्री.बधाई.
www.gooftgu.blogspot.com

sangeeta swarup 16 फरवरी 2010 10:03 अपराह्न  

आज आपका ये ब्लॉग बच्चों को समर्पित देखा....बहुत आनंद आया...आपके इस प्रयास के लिए साधुवाद ...

बहुत प्यारी रचना....बच्चों को जिंदगी की बेहतरीन सीख देती हुई...

रश्मि प्रभा... 17 फरवरी 2010 11:12 पूर्वाह्न  

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