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“भगवान एक है!" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

>> 19 February, 2010

मन्दिर, मस्जिद और गुरूद्वारे।
भक्तों को लगते हैं प्यारे।। 
हिन्दू मन्दिर में हैं जाते।
देवताओं को शीश नवाते।।
ईसाई गिरजाघर जाते।
दीन-दलित को गले लगाते।। 
जहाँ इमाम नमाज पढ़ाता।
मस्जिद उसे पुकारा जाता।।
सिक्खों को प्यारे गुरूद्वारे।
मत्था वहाँ टिकाते सारे।।


राहें सबकी अलग-अलग हैं।
पर सबके अरमान नेक है।

नाम अलग हैं, पन्थ भिन्न हैं।
पर जग में भगवान एक है।।

(सभी चित्र गूगल से साभार)

7 comments:

निर्मला कपिला 19 फरवरी 2010 9:06 अपराह्न  

बच्चों को एकता का पाठ पढाता सुन्दर बालगीत बहुत बहुत बधाई

सुरेन्द्र "मुल्हिद" 19 फरवरी 2010 9:40 अपराह्न  

mazaa aa gaya padh kar....

hindu, muslim, sikh, isaai, aapas mein sab bhai bhai...

संगीता पुरी 19 फरवरी 2010 9:43 अपराह्न  

बच्‍चों को तो कमाल की ट्रेनिंग दे रहे हैं आप .. जिनके छोटे बच्‍चे होंगे .. वो खुश हो जाएंगे !!

Suman 19 फरवरी 2010 9:56 अपराह्न  

nice

वन्दना 20 फरवरी 2010 11:56 पूर्वाह्न  

is baal geet ke madhyam se bahut hi sundar sandesh diya hai.

sangeeta swarup 20 फरवरी 2010 4:49 अपराह्न  

अनेकता में एकता का सन्देश देता सुन्दर बाल गीत ...

बहुत बहुत बधाई

रावेंद्रकुमार रवि 21 फरवरी 2010 1:24 अपराह्न  

संगीता जी की बात से सहमत हूँ!

"चुराइए मत! अनुमति लेकर छापिए!!

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