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19 फ़रवरी, 2010

“भगवान एक है!" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

मन्दिर, मस्जिद और गुरूद्वारे।
भक्तों को लगते हैं प्यारे।। 
हिन्दू मन्दिर में हैं जाते।
देवताओं को शीश नवाते।।
ईसाई गिरजाघर जाते।
दीन-दलित को गले लगाते।। 
जहाँ इमाम नमाज पढ़ाता।
मस्जिद उसे पुकारा जाता।।
सिक्खों को प्यारे गुरूद्वारे।
मत्था वहाँ टिकाते सारे।।


राहें सबकी अलग-अलग हैं।
पर सबके अरमान नेक है।

नाम अलग हैं, पन्थ भिन्न हैं।
पर जग में भगवान एक है।।

(सभी चित्र गूगल से साभार)