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24 फ़रवरी, 2010

“संगीता स्वरूप का बालगीतः रेल” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”

छुक-छुक करती आई रेल!


छुक-छुक करती आई रेल!
आओ मिलकर खेलें खेल!!

लालू-ममता जल्दी आओ!
आकर के डिब्बा बन जाओ!!
खूब चलेगी अपनी रेल!
आओ मिलकर खेलें खेल!!

गुड्डी आई पिंकी आई!
लाल हरी झण्डी ले आई!!
लगी रेंगने अपनी रेल!
आओ मिलकर खेलें खेल!!

इंजन चलता आगे-आगे!
पीछे-पीछे डिब्बे भागे!!
स्टेशन पर रुकती रेल!
आओ मिलकर खेलें खेल!!

टिकट कटाओ करो सवारी!
बिना टिकट जुर्माना भारी!!
जाना पड़ सकता है जेल!
आओ मिलकर खेलें खेल!!
sangitaswaroop
(श्रीमती संगीता स्वरूप)

(चित्र गूगल सर्च से साभार)