कविता : आधी आजादी
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आधी आजादी
हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओ...
6 घंटे पहले
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6 comments:
आपके लिखे बाल गीतों में ज्ञान का अनुपम भण्डार है....बहुत सुन्दर रचना..
कितना काला इसका तन है।
किन्तु बड़ा ही उजला मन है।
बहुत सही और सुन्दर , इंसानों में तो इसके बिलकुल उलट है !
संगीता जी ने सब कह दिया…………॥बहुत सुन्दर बाल गीत्।
bahut hee pyaara baal-geet , bhavare ki bhaanti hi gungunaane ko majboor karta hai , haardik badhaaii
बाल गीत में जान है ।
दिल इस पर कुर्बान है॥
यह फूलों का रस पीता है।
मीठा रस पीकर जीता है।।
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काश, अगर मैं भँवरा होता,
मैं भी रस पी-पीकर जीता!
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