कविता : आधी आजादी
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आधी आजादी
हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओ...
12 घंटे पहले
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11 comments:
सुंदर बाल गीत....बधाई!!
घड़े और मटकी का इसने,
तो कर दिया सफाया है।
आपका यह बाल गीत
मुझको तो बहुत भाया है.
बहुत अच्छा लगा ये बाल गीत धन्यवाद।
बढ़िया बाल गीत.
मेरा लाल रंग का फ्रीज आपको कहाँ से दिखायी दे गया जो उसी का चित्र दे दिया। बढिया है, अब बेचारे मटकों के दिन तो लद गए। लेकिन एक बात आपको बताएं। हमारे उदयपुर में प्रतिवर्ष मटकों का मेला भरता है। अभी कुछ दिन पहले ही लगा था, एक भी मटका नहीं बचा, सभी बिक गए। अभी देश की बहुत बड़ी जनसंख्या है जो इनकी आवश्यकता को जानती है।
nice
Bahut Badhiya !
bahut badhiya baal geet.
बहुत सुन्दर बाल गीत...फ्रिज की उपयोगिता का सुन्दर वर्णन ..
sunder bal geet .
Sahi baat kahi bahut sundar..Dhanywaad!
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