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20 मार्च, 2010

‘‘टेली-विजन’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


मेरा टी0वी0 है अनमोल।
खोल रहा दुनिया की पोल।।


इसमें चैनल एक हजार।
इसके बिन जीवन बेकार।।


कितना प्यारा और सलोना।
बच्चों का ये एक खिलौना।।


समाचार इसमें हैं आते।
कार्टून हैं खूब हँसाते।।


गीत और संगीत सुनाता।
पल-पल की घटना बतलाता।।

बस रिमोट का बटन दबाओ।
मनचाहा चैनल पा जाओ।।



यह सबके मन को भाता है।
क्रि-केट, कुश्ती दिखलाता है।।


नृत्य सिखाता, मन बहलाता।
नये-नये पकवान बताता।।

नई-नई कारों को देखो।
जगमग त्योहारों को देखो।।

नये-नये देखो परिधान।
टेली-विजन बहुत महान।।
(रिमोट, कार और त्योहार के चित्र गूगल सर्च से साभार)