यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

26 मार्च, 2010

"सब्जी-मण्डी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

Vegetable_market_in_Heraklion
देखो-देखो सब्जी-मण्डी,
बिकते आलू,बैंगन,भिण्डी।
कच्चे केले, पक्के केले,
मटर, टमाटर के हैं ठेले।
गोभी,पालक,मिर्च हरी है,
धनिये से टोकरी भरी है।
लौकी, तोरी और परबल हैं,
पीले-पीले सीताफल हैं।
अचरज में है जनता सारी,
सब्जी-मण्डी कितनी प्यारी।

(चित्र गूगल सर्च से साभार)

5 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रचना, आकर्षक प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह.... आपकी कविता पढ़ कर तो सब सब्जियों के नाम भी याद हो जायेंगे....बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  3. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है .

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।