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"गैस सिलेण्डर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

>> 13 March, 2010


गैस सिलेण्डर कितना प्यारा।


मम्मी की आँखों का तारा।।



रेगूलेटर अच्छा लाना।


सही ढंग से इसे लगाना।।



गैस सिलेण्डर है वरदान।


यह रसोई-घर की है शान।।



दूघ पकाओ, चाय बनाओ।


मनचाहे पकवान बनाओ।।



बिजली अगर नही है घर में।


यह प्रकाश देता पल भर में।।



बाथरूम में इसे लगाओ।


गर्म-गर्म पानी से न्हाओ।।



बीत गया है वक्त पुराना।


अब आया है नया जमाना।।



जंगल से लकड़ी मत लाना।


बड़ा सहज है गैस जलाना।।



किन्तु सुरक्षा को अपनाना।


इसे कार में नही लगाना।


(चित्र गूगल सर्च से साभार)

13 comments:

अविनाश वाचस्पति 13 मार्च 2010 8:54 पूर्वाह्न  

बहुत सुंदर गीत। मयंक जी का तो कोई जवाब ही नहीं है। जिस पर चाहो उस पर तुरत गीत लो। परंतु नाराज हो जाएंगे गैस के पाईप और चूल्‍हे कि हमें क्‍यों छोड़ दिया है, हम पर भी गीत लिखो। हम पर भी सार्थक बुनो। हमें भी बढि़या लगाना। फिर नहीं आएगा जोखिम का तराना।

विनोद कुमार पांडेय 13 मार्च 2010 8:59 पूर्वाह्न  

न तो कविता का कोई जवाब है और न ही आपका..बस शब्द चाहिए और सुंदर भाव से सजी कविता सामने...
बहुत बढ़िया लगी यह आपकी गीत...

Babli 13 मार्च 2010 9:13 पूर्वाह्न  

बहुत ही सुन्दरता से आपने गैस सिलिंडर पर गीत प्रस्तुत किया है! आपका जवाब नहीं शास्त्री जी चाहे वो रचना हो या गीत हर एक पोस्ट आपका लाजवाब होता है! ये तो माँ सरस्वती की देन है और आप हर चीज़ पर इतनी खूबसूरती से लिखते हैं की पढ़ने को भी अच्छा लगता है और ज्ञान भी मिलती है!

vigyanchopal 13 मार्च 2010 9:38 पूर्वाह्न  

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vigyanchopal 13 मार्च 2010 9:42 पूर्वाह्न  

mayank ji apki ji gas sylander par apki kavita vahut achi lagi dhanaybad

vigyanchopal 13 मार्च 2010 9:43 पूर्वाह्न  

mayank ji apki gas sylander par apki kavita vahut achi lagi dhanaybad

vigyanchopal 13 मार्च 2010 9:45 पूर्वाह्न  

mayank ji apki gas sylander par apki kavita vahut achi lagi dhanaybad

निर्मला कपिला 13 मार्च 2010 11:00 पूर्वाह्न  

वाह बहुत सुन्दर आप धीरे धीरे बच्चों को घर की हर चीज के बारे मे कविता के माध्यम से अच्छी सीख देते हैं। बधाई इस रचना के लिये।

संगीता पुरी 13 मार्च 2010 12:29 अपराह्न  

वाह .. हर शब्‍द पर गीत .. शास्‍त्री जी का क्‍या कहना !!

वन्दना 13 मार्च 2010 12:59 अपराह्न  

yahi to aapki khoobi hai...........har shabd par rachna bana dete hain.......bahut sundar.

Udan Tashtari 13 मार्च 2010 8:06 अपराह्न  

उपयोगिता पर सुन्दर गीत...

sangeeta swarup 13 मार्च 2010 8:37 अपराह्न  

बाल गीत के माध्यम से बड़ों को भी सीख मिल रही है....बहुत अच्छी रचना..

राजकुमार सोनी 13 मार्च 2010 9:35 अपराह्न  

आपकी रचना पढ़ी। पढ़कर लगा कि आप कठिन सी कठिन बात को बेहद सुगमता से कहने की कला में माहिर है। यह आसान नहीं है। कठिन हो जाना तो सरल होता है लेकिन मुझे लगता है सरल होना ज्यादा कठिन काम है। सरल होने की जो कठिनाई आप उठा रहे हैं उसके लिए मेरी बधाई स्वीकारें। आप मुझ से उम्र में बड़े है। समय-समय पर सलाह भी देते रहे।

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