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‘‘वफादार है बड़े काम का’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

>> 28 March, 2010




यह कुत्ता है बड़ा शिकारी।
बिल्ली का दुश्मन है भारी।।

बन्दर अगर इसे दिख जाता।
भौंक-भौंक कर उसे भगाता।।

उछल-उछल कर दौड़ लगाता।
बॉल पकड़ कर जल्दी लाता।।

यह सीधा-सच्चा लगता है।
बच्चों को अच्छा लगता है।।

धवल दूध सा तन है सारा।
इसका नाम फिरंगी प्यारा।।

आँखें इसकी चमकीली हैं।
भूरी सी हैं और नीली हैं।।

जग जाता है यह आहट से।
साथ-साथ चल पड़ता झट से।।

प्यारा सा पिल्ला ले आना।
सुवह शाम इसको टहलाना।।

नौकर है यह बिना दाम का।
वफादार है बड़े काम का।।

7 comments:

वन्दना 28 मार्च 2010 8:55 अपराह्न  

waah waah.........bahut hi sundar chitrmay baal kavita.

संजय भास्कर 28 मार्च 2010 9:28 अपराह्न  

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

Suman 28 मार्च 2010 9:31 अपराह्न  

nice

अक्षिता (पाखी) 30 मार्च 2010 10:02 पूर्वाह्न  

प्यारा गीत है..मजा आ गया पढ़कर.

Babli 30 मार्च 2010 12:55 अपराह्न  

वाह बहुत ही सुन्दर और प्यारा गीत! बढ़िया प्रस्तुती!

sangeeta swarup 30 मार्च 2010 6:54 अपराह्न  

वाह.. बहुत सुन्दर कविता...

माधव 5 अप्रैल 2010 4:20 अपराह्न  

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