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“मच्छर-दानी” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

>> 01 March, 2010


जिसमें नींद चैन की आती।
वो मच्छर-दानी कहलाती।।
लाल-गुलाबी और हैं धानी।
नीली-पीली बड़ी सुहानी।।
छोटी, बड़ी और दरम्यानी।
कई तरह की मच्छर-दानी।।
इसको खोलो और लगाओ।
बिस्तर पर सुख से सो जाओ।।
जब ठण्डक कम हो जाती है।
गरमी और बारिश आती है।।
 
तब मच्छर हैं बहुत सताते।
भिन-भिन करके शोर मचाते।।
खून चूस कर दम लेते हैं।
डेंगू-फीवर कर देते हैं।।
मच्छर से छुटकारा पाओ।
मच्छरदानी को अपनाओ।।

14 comments:

वन्दना 1 मार्च 2010 12:59 अपराह्न  

BAHUT SUNDAR.........HAPPY HOLI.

Suman 1 मार्च 2010 1:31 अपराह्न  

आपको तथा आपके परिवार को होली की शुभकामनाएँ.nice

Vivek Rastogi 1 मार्च 2010 1:36 अपराह्न  

होली की शुभकामनाएँ ।

अविनाश वाचस्पति 1 मार्च 2010 2:09 अपराह्न  

मयंक जी एक रंगदानी की भी व्‍यवस्‍था कीजिए
या तो उसमें रंग भरे हों
या सभी मन रंग से रंगे हों
मच्‍छर कथा मैं सुनाता हूं
एक युवा उत्‍साही युवा मच्‍छर घर लौटा तो उसके मच्‍छरबाप ने पूछा कैसा रहा सफर, बोला बहुत सुंदर सब मुझे देख कर खूब उछल भाग कर तालियां बजा रहे थे। निश्चित मच्‍छर बहुत खुश था बचने पर। पर मच्‍छरबाप ने चैन की सांस ली, उसके बेटे के उपर से खतरा जो टल गया।

काजल कुमार Kajal Kumar 1 मार्च 2010 3:41 अपराह्न  

:)

sangeeta swarup 1 मार्च 2010 3:52 अपराह्न  

मछारों से बचने का सन्देश देती अच्छी बाल कविता...
होली की शुभकामनायें

Sanjay Kareer 1 मार्च 2010 4:10 अपराह्न  

होली पर आपको अनेक शुभकामनाएं
उदकक्ष्‍वेड़ि‍का …यानी बुंदेलखंड में होली

मुंहफट 1 मार्च 2010 4:23 अपराह्न  

होली पर हार्दिक शुभकामनाएं. पढ़ते रहिए www.sansadji.com सांसदजी डॉट कॉम

रवि कुमार, रावतभाटा 1 मार्च 2010 4:29 अपराह्न  

यह भी खूब है...
शुभकामनाएं...

संगीता पुरी 1 मार्च 2010 4:30 अपराह्न  

बहुत बढिया .. सपरिवार आपको होली की अनेको शुभकामनाएं !!

अनामिका की सदाये...... 1 मार्च 2010 7:40 अपराह्न  

macchhar raja mujhe mat khana
raato ke sipahi..kahi aur jana..

bhi-bhi karega to lagaungi 4 dande..
bulangi macchhardani..bhagungi tujhe..

shastri ji aapki rachna se utsahit hokar ye lines likh payi.

badhayi aapki rachna k liye.
happy holi.

Udan Tashtari 1 मार्च 2010 7:40 अपराह्न  

अच्छा संदेश!


ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.


आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

-समीर लाल ’समीर’

RaniVishal 2 मार्च 2010 1:23 पूर्वाह्न  

Sundar sandesh ke sath sundar bal kavita!

Happy Holi

गिरीश बिल्लोरे मुकुल अब पॉडकास्टर 2 मार्च 2010 1:17 अपराह्न  

जय हो शास्त्री जी
आनंद आ गया

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