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21 दिसंबर, 2011

"वर्षा आई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



शीतल पवन चली सुखदायी।
रिम-झिमरिम-झिम वर्षा आई।
भीग रहे हैं पेड़ों के तन,
भीग रहे हैं आँगन उपवन,
हरियाली सबके मन भाई।
रिम-झिमरिम-झिम वर्षा आई।।

मेंढक टर्र-टर्र चिल्लाते,
झींगुर मस्ती में हैं गाते,
आमों की बहार ले आई।
रिम-झिमरिम-झिम वर्षा आई।।

आसमान में बिजली कड़की,
डर से सहमें लडका-लड़की,
बन्दर जी की शामत आई।
रिम-झिमरिम-झिम वर्षा आई।।

कहीं छाँव हैकहीं धूप है,
इन्द्रधनुष कितना अनूप है,
धरती ने है प्यास बुझाई।
रिम-झिमरिम-झिम वर्षा आई।।

कल विद्यालय भी जाना है,
होम-वर्क भी जँचवाना है,
मुन्नी कॉपी लेकर आयी।
रिम-झिमरिम-झिम वर्षा आई।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति ...

    सर्दियों के मौसम में वर्षा का गीत ...ज्यादा ठंडक दे रहा है

    जवाब देंहटाएं
  2. सर्दियों के मौसम में वर्षा...??? बहुत सुन्दर बाल गीत ..

    जवाब देंहटाएं
  3. माह दिसम्बर,वर्षा-गीत ?
    बूँदों का रिमझिम संगीत.
    अति सुंदर.......

    जवाब देंहटाएं
  4. अच्छा बाल गीत पर दिसंबर में बरसात
    ऐसा क्यूँ ?
    पर कविता बहुत बहुत अच्छी |
    आशा

    जवाब देंहटाएं
  5. behtarin varsha geet..barish ki rimjhim fuharon ka maja aa gaya..sadar badhayee

    जवाब देंहटाएं

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