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07 अक्तूबर, 2010

“वानर” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

monkeycrop जंगल में कपीश का मन्दिर।
जिसमें पूजा करते बन्दर।।
monkey_2कभी यह ऊपर को बढ़ता।
डाल पकड़ पीपल पर चढ़ता।।
monkey_3ऊपर जाता, नीचे आता।
कभी न आलस इसे सताता।।


उछल-कूद वानर करता है।
बहुत कुलाँचे यह भरता है।।

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर कविता.... और साथ में बंदरों के चित्र भी कितने मजेदार.......

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  2. सुन्दर चित्रों के साथ बहुत सुन्दर कविता नानाजी ....धन्यवाद
    नन्ही ब्लॉगर
    अनुष्का

    जवाब देंहटाएं

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