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22 अक्तूबर, 2010

“तोते उड़ते पंख पसार!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

GO8F7402copyLarge2नीला नभ इनका संसार।
तोते उड़ते पंख पसार।।
Parrot-BN_MR7817-w जब कोई भी थक जाता है।
वो डाली पर सुस्ताता है।।
तोता पेड़ों का बासिन्दा।
कहलाता आजाद परिन्दा।।
parrot_2खाने का सामान धरा है।
पर मन में अवसाद भरा है।।
लोहे का हो या कंचन का।
बन्धन दोनों में तन मन का।।
अत्याचार कभी मत करना।
मत इसको पिंजडे में धरना।।
totaकारावास बहुत दुखदायी।
जेल नहीं होती सुखदायी।।
मत देना इसको अवसाद।
करना तोते को आज़ाद।।
(चित्र गूगल छवियों से साभार)

9 टिप्‍पणियां:

  1. कारावास बहुत दुखदायी।
    जेल नहीं होती सुखदायी।।
    मत देना इसको अवसाद।
    करना तोते को आज़ाद।।

    सच्ची बात कही………………एक बेहद उम्दा प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  2. kaash kabhi aaisa ho jaye...
    mera man totaa ban ud_jaye...

    bohot hi badiya..

    Vins :)

    जवाब देंहटाएं
  3. मत देना इसको अवसाद।
    करना तोते को आज़ाद।।

    आपकी रचनाएँ बहुत सुन्दर सन्देश देती हैं

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.... आभार

    जवाब देंहटाएं
  5. तोतों के सारे फोटो बहुत अच्छे लगे मुझे..... और प्यारी लगी आपकी कविता

    जवाब देंहटाएं
  6. एक दम सही बात कही नानाजी आपने इस सुन्दर रचना में ....मुझे भी तोते बहुत अच्छे लगते है .
    मैंने इनकी एक कविता भी सीखी है जल्द ही आपको सुनाउंगी
    आपकी प्यारी
    अनुष्का

    जवाब देंहटाएं

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