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27 नवंबर, 2010

"डस्टर कष्ट बहुत देता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

विद्यालय अच्छा लगता,
पर डस्टर कष्ट बहुत देता है।
पढ़ना तो अच्छा लगता,
पर लिखना कष्ट बहुत देता है।।

दीदी जी तो अच्छी लगतीं,
पर वो काम बहुत देती हैं।
छोटी से छोटी गल्ती पर,
डस्टर कई जमा देतीं हैं।।

कोई तो उनसे यह पूछे,
क्या डस्टर का काम यही है?
कोमल हाथों पर चटकाना,
क्या इसका अपमान नही है??
दीदी हम छोटे बच्चे हैं,
कुछ तो रहम दिखाओ ना।
डाँटो भी, फटकारो भी,
पर हमको मार लगाओ ना।।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

7 टिप्‍पणियां:

  1. bachchon ke man ki bhavnaon ko abhivyakt karta sundar baal geet

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  2. आपकी कविता बाल-मनोभावों के अनुकूल है . बधाई .

    जवाब देंहटाएं

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