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01 फ़रवरी, 2011

"तीन रंग का झण्डा प्यारा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

तीन रंग का झण्डा न्यारा।
हमको है प्राणों से प्यारा।।

त्याग और बलिदानों का वर।
रंग केसरिया सबसे ऊपर।।

इसके बाद श्वेत रंग आता।
हमें शान्ति का ढंग सुहाता।।

सबसे नीचे रंग हरा है।
हरी-भरी यह वसुन्धरा है।।

बीचों-बीच चक्र है सुन्दर।
हों विकास भारत के अन्दर।।
चित्रांकन
प्रांजल
-0-0-0-
प्यारे बच्चों!
आपके पढ़ने के लिए दे रहा हूँ,
कुछ बाल पत्रिकाओं की जानकारी!
साफ-साफ पढ़ने के लिए
इस कतरन पर क्लिक कीजिए।

8 टिप्‍पणियां:

  1. तिरंगे पर लिखी एक बेहद सुन्दर कविता दिल मे उतर गयी।

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  2. शीर्षक देखकर ही पोस्‍ट पढने का मन किया, कारण यह कि पिछले साल 26 जनवरी को मेरी बिटिया को स्‍कूल में इसी शीर्षक की कविता याद कराई गई थी। के जी 1 में पढने वाली मेरी बिटिया ने ''तीन रंग का प्‍यारा झंडा, लहर लहर लहराए झंडा, आओ इसको शीश झुकाएं, जन मन गण का गान गाए, जय हिंद'' को घर में सैकडों बार दुहराया। और फिर स्‍कूल में जाकर सुनाया। बहरहाल मौजूदा कविता भी अच्‍छी है, प्‍यारी है।

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  3. bohot hi sundar rachna...

    Hamarey garv "tirange" ki behtarin vyakhya...

    जवाब देंहटाएं
  4. तिरंगे के रंगों का महत्त्व बहुत सुन्दर रूप में प्रस्तुत किया है..आभार

    जवाब देंहटाएं
  5. कविता सुंदर । बाल पत्रिकाओँ की जानकारी देकर आपने सराहनीय कार्य किया । धन्यवाद ।

    जवाब देंहटाएं
  6. aadarniy sir kafi dino baad aapke blog par aai hun .karan kafi aswasthata ke dour se gujar rahi thi .abhi bhi puri tarah se swasth nhai hun ,fir bhi koshish karungi aap sab tak dheere dheere pahunchne ke liye.

    rashtry tiranga ,hammare desh ki shaan.us par aapki kavita bahut bahut pasand aai.bahut hi sundar tareeke se v dil me utarne wali kavita.
    aapko bahut bahut badhai
    poonam

    जवाब देंहटाएं

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