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09 जुलाई, 2012

"शादी आज बनाओगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 
कहाँ चले ओ बन्दर मामा,
मामी जी को साथ लिए।
इतने सुन्दर वस्त्र आपको,
किसने हैं उपहार किये।।

हमको ये आभास हो रहा,
शादी आज बनाओगे।
मामी जी के साथकहीं
उपवन में मौज मनाओगे।।

दो बच्चे होते हैं अच्छे,
रीत यही अपनाना तुम।
महँगाई की मार बहुत है,
मत परिवार बढ़ाना तुम।

चना-चबेना खाकरअपनी
गुजर-बसर कर लेना तुम।
अपने दिल में प्यारे मामा,
धीरजता धर लेना तुम।।

छीन-झपटचोरी-जारी से,
सदा बचाना अपने को।
माल पराया पा करकेमत
रामनाम को जपना तुम।।

कभी इलैक्शन मत लड़ना,
संसद में मारा-मारी है।
वहाँ तुम्हारे कितने भाई,
बैठे भारी-भारी हैं।।

हनूमान के वंशज हो तुम,
ध्यान तुम्हारा हम धरते।
सुखी रहो मामा-मामी तुम,
यही कामना हम करते।।

7 टिप्‍पणियां:

  1. यह है बुधवार की खबर ।

    उत्कृष्ट प्रस्तुति चर्चा मंच पर ।।



    आइये-

    सादर ।।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत रोचक बाल कविता बहुत मजेदार

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर बाल कविता .....
    अच्छे संदेश के साथ ....

    जवाब देंहटाएं
  4. छीन-झपट, चोरी-जारी से,
    सदा बचाना अपने को।
    माल पराया पा करके, मत
    रामनाम को जपना तुम।।

    बहुत बढ़िया सन्देश

    जवाब देंहटाएं
  5. छीन-झपट, चोरी-जारी से,
    सदा बचाना अपने को।
    माल पराया पा करके, मत
    रामनाम को जपना तुम।।

    Nice.

    जवाब देंहटाएं

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