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14 नवंबर, 2015

"बाल-दिवस-पं. नेहरू को शत्-शत् नमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


राष्ट्र-नायक पं. नेहरू को शत्-शत् नमन!

चाचा नेहरू तुमने 

प्यारे बच्चों को ईनाम दिया था।
अपने जन्म-दिवस को 
तुमने बाल-दिवस का नाम दिया था।

फूलों की मुस्कानों से महके उपवन।
बच्चों की किलकारी से गूँजे आँगन।।

एक साल में एक बार ही बाल दिवस आता है।
मास नवम्बर नेहरू जी की हमको याद दिलाता है।।

लाल-जवाहर के सीने पर सजा सुमन है।
अभिनव भारत के निर्माता तुम्हें नमन है।।

14 नवंबर, 2012

"चाचा नेहरू को नमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू को
शत्-शत् नमन!

जिस दिन लाल जवाहर ने था,
जन्म जगत में पाया।
उसका जन्मदिवस भारत में
बाल दिवस कहलाया।।

मोती लाल पिता बैरिस्टर,
माता थी स्वरूप रानी।
छोड़ सभी आराम-ऐश को,
राह चुनी थी बेगानी।।
त्याग वकालत को नेहरू ने,
गांधी का पथ अपनाया।
उसका जन्मदिवस भारत में
बाल दिवस कहलाया।।

आजादी पाने की खातिर,
वीरों ने बलिदान दिया।
अमर सपूतों ने पग-पग पर ,
अपमानों का पान किया।
दमन चक्र से जो गोरों के,
कभी नहीं घबराया।
उसका जन्मदिवस भारत में
बाल दिवस कहलाया।।

दागे नहीं तोप से गोले,
ना बरछी तलवार उठायी।
सत्य-अहिंसा के बल पर,
खोई आजादी पायी।
अनशन करके, अंग्रेजों से,
शासन वापिस पाया।
उसका जन्मदिवस भारत में
बाल दिवस कहलाया।।

बच्चों को जो सदा प्यार से,
हँसकर गले लगाता था।
इसीलिए तो लाल जवाहर,
चाचा जी कहलाता था।
अपने जन्मदिवस को जिसने,
बालकदिवस बनाया।
उसका जन्मदिवस भारत में
बाल दिवस कहलाया।।

शासक था स्वदेश का पहला,
अपना प्यारा चाचा।
नवभारत के निर्माता का,
मन था सीधा-साचा।
उद्योगों का जिसने,
चौबिस घंटे चक्र चलाया।
उसका जन्मदिवस भारत में
बाल दिवस कहलाया।।