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02 मार्च, 2014

"लैपटॉप" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से
बालकविता
“लैपटॉप”
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इस बस्ते में क्या है भइया,
हमें खोल कर दिखलाओ!
कहाँ चले तुम इसको लेकर,
कुछ हमको भी बतलाओ!! 

इसमें प्यारा लैपटॉप है,
छोटा सा है कम्प्यूटर!
नये जमाने का इसको ही,
हम तो कहते हैं ट्यूटर!!
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जो कुछ डेस्कटॉप में होता,
वही सभी कुछ है इसमें!
चाहे कहीं इसे ले जाओ,
यही खूबियाँ हैं इसमें!!

अगर घूमने जाओ पार्क में,
संग इसे भी ले जाओ!
रेल और बस में जाओ तो,
इससे इण्टरनेट चलाओ!!

गाना सुनने का यदि मन हो,
मनचाहा तुम गीत सुनो!
देशी और विदेशी चाहे,
कैसा भी संगीत सुनो!!

इसमें छोटा माउस-पैड है,
सुन्दर सा की-बोर्ड बना है!
यह खिलौना बहुत सलोना,
मुझको इससे प्यार घना है!!

09 अप्रैल, 2011

"पतझड़ आज बसन्त हो गया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


एक साल के बाद हमारा,
लैपटॉप जीवन्त हो गया।
एकाकीपन की घड़ियों का,
अब लगता है अन्त हो गया।।
यह प्यारा सा संगी-साथी,
मेरा साथ निभाता है।
नये-नये चिट्ठाकारों से,
खुश होकर मिलवाता है।।
कलियुग की जीवन धारा में,
यह ज्ञानी और सन्त हो गया।
एकाकीपन की घड़ियों का,
अब लगता है अन्त हो गया।।
बहुत दिनों बीमार रहा यह,
दिल्ली जाकर स्वस्थ हो गया।
नई कुंजियों को पा करके,
पहले जैसा मस्त हो गया।
संजीवनी चबा कर फिर से,
बलशाली हनुमन्त हो गया।
एकाकीपन की घड़ियों का,
अब लगता है अन्त हो गया।।
बहुत दिनों के बाद तुम्हारा,
चित्र आज मैं खीँच रहा हूँ।
ब्लॉगिंग की केसर क्यारी को,
मित्र तुम्हीं से सींच रहा हूँ।
तुमको वापिस पा जाने से,
पतझड़ आज बसन्त हो गया।
एकाकीपन की घड़ियों का,
अब लगता है अन्त हो गया।।