नभ में उड़ती इठलाती है।
मुझको पतंग बहुत भाती है।।
रंग-बिरंगी चिड़िया जैसी,
लहर-लहर लहराती है।।
कलाबाजियाँ करती है जब,
मुझको बहुत लुभाती है।।
इसे देखकर मुन्नी-माला,
फूली नहीं समाती है।।
पाकर कोई सहेली अपनी,
दाँव-पेंच दिखलाती है।।
मुझको बहुत कष्ट होता है।
जब पतंग कट जाती है।।