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07 जनवरी, 2011
"खटीमा 9 जनवरी को अवश्य पधारें" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक")
04 जनवरी, 2011
"मेरी डॉल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
मम्मी देखो मेरी डॉल।
खेल रही है यह तो बॉल।।
पढ़ना-लिखना इसे न आता।
खेल-खेलना बहुत सुहाता।।
कॉपी-पुस्तक इसे दिलाना।
विद्यालय में नाम लिखाना।।
रोज सवेरे मैं गुड़िया को,
ए.बी.सी.डी. सिखलाऊँगी।
अपने साथ इसे भी मैं तो,
विद्यालय में ले जाऊँगी।।
चित्रांकन - कु. प्राची
01 जनवरी, 2011
"शुभ हो सबको यह नया साल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
खाने को मिलता रहे माल!
शुभ हो सबको यह नया साल!!
स्वस्थ रहें नर और नारी,
सन्तान रहें आज्ञाकारी,
कचरा नहीं बीने कोई बाल!
शुभ हो सबको यह नया साल!!
♥ अब देखिए आज के चित्र पर कविता ♥
छील पेंसिल को मैंने इस कागज पर चिपकाया है।
देखो मम्मी मैंने कितना सुन्दर चित्र बनाया है।।
हरे रंग से पौधे में पत्तियाँ बनाई।
लाल रंग से इसमें कलियाँ बहुत सजाई।।
छीलन को चिपकाकर मोहक फूल खिलाए।
मेरी चित्रकला सबका मन बहुत लुभाए।।
सुमनो से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं होता।
इन्हें देखकर रोता बालक भी चुप होता।।
लिखना सदा सुलेख, मनोरम चित्र बनाना।
बैर-भाव को भूल सभी को मित्र बनाना।।
चित्रांकन-प्रांजल
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